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आपदा के नाम पर लूटखसोट

Uttar Kashi

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
केस नंबर 1- सिंचाई विभाग ने बाढ़ सुरक्षा कार्य के तहत पौटी गांव में वर्ष 2010-11 में 8 लाख रुपये लागत से सीसी ब्लाक बनाए थे। इस साल दैवी आपदा में इसकी मरम्मत के लिए 55.73 लाख रुपये का आगणन दिया गया है।
केस नंबर 2- ब्लाक कार्यालय ने दो साल पहले खांड गांव से फाल्टा गाड तक 80 हजार में संपर्क मार्ग बनाया था। अब इसकी मरम्मत के लिए 4.22 लाख रुपये की डिमांड की गई है। 60 हजार में चपटाड़ी से सैराली तोक तक बने संपर्क मार्ग के लिए भी ढाई लाख का आगणन थमाया गया है।

केस नंबर 3- लघु सिंचाई विभाग ने कोटी गांव के दिनाला तोक में एक लाख रुपये लागत से 200 मीटर लंबी गूल बनायी थी। आपदा में क्षतिग्रस्त इस गूल की मरम्मत के लिए 3.10 लाख का आगणन तैयार हो चुका है।

दिनेश रावत
बड़कोट। राहत और मरम्मत कार्यों के नाम पर बेहिसाब लूटखसोट हो रही है। खासकर सरकारी विभाग की स्थिति तो ऐसी है मानो उन्हें आपदा का ही इंतजार था। छोटे-मोटे नुकसान को भी बेहद बड़ा बताकर विभाग दिल खोलकर पैसा मांग रहे हैं। जिस काम पर एक या डेढ़ साल पहले आठ लाख रुपये खर्च हुए थे उसकी मरम्मत के लिए अब 55 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं। आपदा में जीवन भर की कमाई गंवाने के बावजूद सहायता के नाम पर चंद हजार रुपये हाथों में लिए लोग बड़ी मायूसी और गुस्से से इस लूट को देख रहे हैं।
ऐसे एकाध नहीं कई मामले सामने आ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक अगस्त में आई बाढ़ में ज्यादा से ज्यादा करीब सौ करोड़ की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, लेकिन आंकलन इतना कि कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता। सरकारी परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के आगणन 600 करोड़ रुपये के आंकड़े पार कर चुके हैं। हैरानी की बात तो यह है कि यह आगणन तकनीकी विभाग व राजस्व विभाग की संयुक्त रिपोर्ट के बाद ही जिला मुख्यालय भेजे जाते हैं।

इनके लिए नहीं कोई मानक
आपदा में अपना सबकुछ गवां चुके लोग भले ही मनमाने मानकों की मार झेल रहे हैं, लेकिन सरकारी विभागों पर कोई मानक लागू नहीं होता। निजी संपत्तियों के नुकसान के एवज में लोगों को महज पांच करोड़ रुपये की सहायता बांटी गई, जबकि सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान का अनुमान ही सोच से परे है।

गड़बड़ी पर है नजर : एसडीएम
बड़कोट। एसडीएम परमानंद राम भी इस तरह की गड़बड़ियों को स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि हर पत्रावली को विस्तार से देखा जाना संभव नहीं है। जिस भी आगणन में गड़बड़ी लग रही है उसे आख्या के साथ डीएम को प्रेषित किया गया है। ताकी ऐसी योजनाओं पर अकुंश लगे और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो सके।

एक आदेश ने खोली पोल
बड़कोट। असल में एसडीएम के एक आदेश के बाद यह सभी गड़बड़ियां सामने आई हैं। एसडीएम ने सभी विभागों को क्षतिग्रस्त हुई सरकारी संपत्ति के आगणन पर योजना की लागत और निर्माण वर्ष अंकित करने के भी आदेश दिए थे। इसी आदेश के कारण बड़े पैमाने पर हो रहा गोलमाल सामने आया है।
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