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यमुना घाटी में भी तबाही का मंजर

Uttar Kashi

Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। असी गंगा घाटी के बाद अब यमुना घाटी में भी तबाही का मंजर दिखने लगा है। यमुनोत्री राजमार्ग के कई हिस्से तहस-नहस होने से गीठ पट्टी के गांवों में भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। स्थिति यह है कि जनकीचट्टी तक पहुंचने के लिए बड़कोट से सेनाचट्टी तक 26 किलोमीटर गाड़ी से सफर करने के बाद 17 किलोमीटर दूरी पैदल नापनी पड़ रही है। ऐसे में राशन या सहायता पहुंचना तो दूर की बात है। स्थिति यह है कि खरसाली व बीफ गांव में माचिस तीन रुपये में मिल रही है। नौगांव में बरसाती गदेरे ने जमकर तबाही मचाई है।
स्यानाचट्टी से लेकर 17 किमी दूर जानकीचट्टी तक यमुनोत्री राजमार्ग कई जगह यमुना में बह गया है। कई दिनों से जारी बारिश से धंसाव की चपेट में आए बाडिया गांव के कई मकान ढहने की कगार पर हैं। यहां नीचे की ओर राजमार्ग धंस कर सीधे नदी में पहुंच गया है। मदेश गांव भी भू धंसाव की चपेट में है। पिंडकी, निषणी गांव में अश्वमार्ग तक नहीं बचे। यमुनोत्री यात्रा मार्ग के अंतिम पड़ाव बीफ जानकीचट्टी व खरसाली गांव के अधिकांश लोगों की मुख्य आजीविका तीर्थयात्रा व आलू पर टिकी है। सड़क टूटने से यात्रा ठप है। गांवों में चाय, चीनी, तंबाकू, मसाला, नमक, तेल, साबुन, बिजली के बल्ब, माचिस आदि जरूरी सामान के बिना लोग गुजारा कर रहे हैं। अनाज का संकट है सो अलग। यहां लोग प्राय: आलू बेचकर बर्फबारी के समय चार महीने का राशन भरते हैं। इससे पहले लोग कम ही राशन घर में रखते हैं।

राशन भेज दो, कीमत ले लो
उत्तरकाशी। खरसाली के जयेंद्र तोमर, खिलानंद उनियाल एवं बीफ गांव के जगत सिंह का कहना है कि कुछ ही लोग राशन के लिए बड़कोट जा पा रहे हैं। 10 किमी सामान पीठ पर लादकर 17 किमी का जान जोखिम में डालने वाला सफर करने की हिम्मत कम ही लोग जुटा पा रहे हैं। सरकार यदि आपदा ग्रस्त क्षेत्र की सुध लेती तो खरसाली हैलीपैड से यात्रियों को ढोने की तरह उनके लिए जरूरी सामान पहुंचा सकती थी। ग्रामीण राशन की कीमत देने को भी तैयार हैं।

भू धंसाव से मिल गए खेत
उत्तरकाशी। बीफ गांव में बारिश से ढालदार खेती की जमीन इस कदर नीचे की ओर धंस गई है कि लोगों को अपने खेत पहचानने में भी मुश्किल हो रही है। 37 साल पहले आपसी सहमति से चकबंदी करने वाला यह इकलौते गांव है। लेकिन, अब यहां कौन सा खेत किसका है यही पता नहीं चल रहा।
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