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निजी नुकसान को कम करने की कवायद

Uttar Kashi

Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। कुदरती आपदा से जिले में हुए चौतरफा नुकसान में जब राहत देने की बारी आई तो खेल शुरू हो गया। सरकारी विभाग तो अपने नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर गिनाने में लगे हैं, दूसरी ओर आम लोगों का नुकसान कम से कम दिखाकर मुआवजे से पल्ला झाड़ने की कवायद भी होने लगी है। 17 सरकारी विभागों ने 430 करोड़ रुपये के नुकसान आंकड़ा तैयार किया है। कई और विभाग क्षति का आंकलन करने में जुटे हैं। लेकिन आम जनता का नुकसान पहले करीब 100 करोड़ रुपये बताया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक अब उसे दो-तीन करोड़ तक ही समेटने की तैयारी चल रही है। इस साल अतिवृष्टि में सबसे ज्यादा नुकसान 115.08 करोड़ रुपये उत्तराखंड जल विद्युत निगम का आकलित किया गया है। इनकी असी गंगा में निर्माणाधीन सभी परियोजनाओं का निर्माण धुल गया। जल संस्थान 240 पेयजल योजनाओं का नुकसान गिना रहा है तो वन, सिंचाई, लोनिवि, बीआरओ के अलावा नगर पालिका का नुकसान 51 करोड़ से अधिक आंका गया है। कुल मिलाकर अभी तक आपदा में 17 विभागों के नुकसान का आंकड़ा 430 करोड़ रुपये पार कर गया है।
इसके उलट आम जनता की निजी संपत्तियों के नुकसान के आकलन में कहीं राजस्व कर्मियों की अनदेखी तो कहीं सरकारी मानकों की कंजूसी साफ नजर आ रही है। राजस्व विभाग ने आपदा में जिले में 106 गांवों के 1664 परिवारों की 8683 जनसंख्या को प्रभावित दिखाया है। इसमें 29 लोगों की मौत, 3 गंभीर और 13 सामान्य घायल दिखाए गए हैं। 335 पशुओं की मौत के अलावा 120 मकान पूर्ण क्षतिग्रस्त, 93 तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त व 98 आंशिक क्षतिग्रस्त दिखाए गए हैं। 44 हेक्टेयर कृषि भूमि की क्षति दिखाई गई है। इसकी क्षतिपूर्ति सरकारी मानकाें के अनुसार दो से तीन करोड़ बैठती है।

तब तो नहीं था मानकों का अड़ंगा
वरुणावत भूस्खलन 2003 तथा वर्ष 1991 के भूकंप के समय भारत सरकार ने परिवार और भवन की परिभाषा के आंकलन में व्यवहारिक मानक तय कर सहायता दी थी। वरुणावत के स्पेशल पैकेज से पुनर्वास के साथ ही क्षतिग्रस्त संपत्तियों के पूरे नुकसान का आंकलन कर पीड़ितों को मुआवजा दिया गया था। 1991 के भूकंप के समय भी छत को नहीं मकान में रहने वाले परिवारों को इकाई मानकर राहत दी गई थी। जबकि इस बार मानकों के अनुसार दी जा रही राहत ऊंट के मुंह में जीरे सरीखी है।
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