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आपदा के दौर में भी बाज नहीं आ रहे मुनाफाखोर

Uttar Kashi

Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। आपदा के इस दौर में भी कई व्यवसायी मांग एवं आपूर्ति का संतुलन गड़बड़ाने पर अर्थशास्त्र के नियम के मुताबिक जरूरत की वस्तुओं की निर्धारित से ज्यादा कीमत वसूलने से बाज नहीं आ रहे हैं। नगर और आसपास के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चीनी 50 से 60 रुपये किलो बेची जा रही है। सब्जी और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी कई दुकानदार मुंह मांगे वसूल रहे हैं।
सरकारी मशीनरी आपदा से बिगड़े हालात को दुरुस्त करने में व्यस्त होने से इन मुनाफाखोरों पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। हालांकि प्रशासन ने ऐसी शिकायतों को देखते हुए व्यापारियों को तय मूल्य पर ही सामान बेचने के निर्देश जारी किए हैं। बुद्धिजीवियों ने भी व्यापारियों से लोगों की परेशानी का नाजायज फायदा न उठाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अनावश्यक भंडारण करने के बजाय सिर्फ जरूरत के आधार पर ही सामान खरीदने की अपील की है, ताकि सप्लाई चेन बहाल होने तक सभी लोगों को जरूरत के सामान उपलब्ध हो सकें।

सामान के लिए जोखिम उठा रहे लोग
उत्तरकाशी। शनिवार रात तक चली तबाही का सिलसिला रविवार को थम गया। जिसके बाद सुबह बारिश के बीच ही लोगों ने खतरे की जद में आए अपने भवनों में से सामान निकालना शुरू कर दिया। इस दौरान कई लोगों द्वारा ढहने की कगार पर पहुंचे भवनों में से भी सामान निकालने की जिद के चलते पुलिस को उन्हें समझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई जगह विवाद खड़ा कर लोग अपने क्षतिग्रस्त भवनों में घुसकर सामान निकालने में लगे रहे। जिससे यहां आपदा गुजरने के बाद भी जान जाने का खतरा मंडरा रहा है।

पेयजल किल्लत से जूझ रहे लोग
उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय के अधिकांश क्षेत्र में जलापूर्ति के स्रोत असी गंगा में मची तबाही के बाद से नगर क्षेत्र में पानी की समस्या गहराने लगी है। सार्वजनिक पेयजल टंकियां खाली होने के बाद अब लोग नहाने-धोने की जरूरत के लिए बरसात का पानी इकठ्ठा करने के साथ ही पेयजल के लिए गिनती के हैंडपंपों के भरोसे हैं। पेयजल के लिए जल संस्थान और नगर पालिका के साथ ही आईटीबीपी से टैंकरों की व्यवस्था की जा रही है। ज्ञानसू तथा जोशियाड़ा लदाड़ी बस्ती के लिए अलग स्रोतों से जलापूर्ति होने से वहां समस्या नगर की अपेक्षा कुछ कम है।
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