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खटीमा में धान क्रय केंद्र बने अव्यवस्थाओं का गढ़

Udham singh nagar

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। खटीमा में किसानों की सहूलियत के लिए खोले गए धान क्रय केंद्र अव्यवस्था के बीच संचालित किए जा रहे हैं। केेंद्र न तो निर्धारित समय पर खोले जा रहे हैं और न ही केंद्र प्रभारी केंद्रों में बैठ रहे हैं। एक केंद्र तो निर्धारित स्थान से दो किमी दूर बगीचे में, जबकि एक केंद्र किसी किसान के घर में खोल दिया गया है, इससे किसान काफी परेशान हैं, उन्हें धान तोल के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। केंद्रोें में मूलभूत पत्रावलियां/प्रपत्र 9 तक नहीं रखे जा रहे हैं।
सहकारिता विभाग के अधिकारियोें के निरीक्षण के बाद क्रय केंद्रों की यह तस्वीर सामने आई है। निरीक्षण में गैर हाजिर रहे पांच केंद्र प्रभारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश सहायक निबंधक ने सहायक जिला विकास अधिकारी को दे दिया है। प्रभारियों को किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए केंद्रों में व्यवस्था दुरुस्त करने की हिदायत दी गई है। एआर मंगला प्रसाद त्रिपाठी ने सोमवार को खटीमा में सहकारिता के क्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। अवकाश के दिन भी निरीक्षण से कर्मचारियों में खलबली मच गई। इस दौरान झनकट, बिगराबाग और उमरुकला में केंद्र प्रभारी नदारद पाए गए। साथ ही केंद्र भी निर्धारित समय (8:30 से 5:30) के काफी देर से (दस बजे से) खोले जाने की पुष्टि हुई। उमरुकला का केंद्र दो किमी दूरी पर एक बगीचे में खोला गया हे, जबकि चंदेली में क्रय केंद्र एक किसान के घर खुला मिला। केंद्र प्रभारी यहां भी गायब मिले। मझोला और चकरपुर में केंद्रों में भी खामियां पाई गयी। इसके अलावा यूसीएफ के क्रय केंद्रों सरपूड़ा, दाहफार्म, पौलीगंज, जमौर, मैनाझुंडी, बिज्टी का भी निरीक्षण किया गया। यहां पर केंद्रों में बोरे ही नहीं पहुंचाए गए हैं। इस पर एआर ने यूसीएफ प्रभारी को जल्द बोरे उपलब्ध कराने को कहा है। मंगलवार को त्रिपाठी ने आवश्यक कार्यवाही संबंधी आदेश सहायक जिला विकास अधिकारी को दे दिए हैं। त्रिपाठी ने बताया केंद्रों में अव्यवस्था एवं ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी तरह की शिकायत पर सख्त कदम उठाया जाएगा।

अव्यवस्था ही अव्यवस्था
रुद्रपुर। क्रय केेंद्रों में निरीक्षण के दौरान खामियां ही खामियां उजागर हुई। केंद्रों में आवश्यक चालान बुक, सिक्स आर, खरीद रजिस्टर, लेखा पर्ची, कृषक सूची, शिकायत और निरीक्षण पंजिका तक दुरुस्त नहीं पाई गई, इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि किसानोें को किन दुविधाओं और संकटों का सामना करना पड़ रहा होगा।
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