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आसान नहीं होगी गोवंशीय पशुओं की खरीद-फरोख्त

Udham singh nagar

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। गोवंशीय पशुओं की खरीद-फरोख्त अब आसान नहीं होगी। पशु खरीददार को संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सक से अनिवार्य रूप से पशु खरीदने का प्रमाण पत्र लेना ही होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के गोवंशीय पशुओं को अलग पहचान देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए टैगिंग प्रक्रिया अपनाई जाएगी और पशुपालक को प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। यह सब गो तस्करी की घटनाओं को रोकने एवं गोवंशीय पशुओं को औने-पौने दामों में बेचने पर पाबंदी लगाने के तहत किया जा रहा है।
गो तस्करी की घटनाओं में लगातार हो रहे इजाफे से उत्तराखंड गो सेवा आयोग हरकत में आ गया है। इस कारण पशु कल्याण बोर्ड अब ग्रामीण क्षेत्र के गोवंशीय पशुओं को भी अलग पहचान (चिह्नीकरण) करने जा रहा है। आयोग के अपर निदेशक डा. एसएस बिष्ट ने राज्य के सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग, पुलिस, पशु क्रूरता समिति सदस्य और पशु प्रेमियों की सहायता से जल्द ही चिह्नीकरण कार्य शुरू करेगा। सहयोग के लिए पुलिस विभाग की ओर से डीजीपी ने सहमति पत्र दे दिया है। चिह्नीकरण का कार्य ग्रामीण क्षेत्र के नजदीकी पशु अधिकारी द्वारा किया जाएगा, साथ ही पशुपालक को पशु होने संबंधी प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
दरअसल, सर्दियों के मौसम में लोगों का पर्वतीय क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रों को आना आम बात है। कई ग्रामीण शीतकालीन प्रवास के दौरान अपने पशुओं को भी साथ लेकर आते हैं, लेकिन अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में चिह्नीकरण की कोई सुविधा न होने से स्पष्ट नहीं हो पाता था कि पशु किस उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। अक्सर गोवंशीय पशुओं की तस्करी की संभावना अधिक बनी रहती है। पशु खरीदने की दशा में भी संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सक से प्रमाण पत्र लेना जरूरी कर दिया गया है। उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम के पालन के तहत यह प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एमएस नयाल ने बताया पर्वतीय क्षेत्र से मैदानी क्षेत्रों में पशुओं को लाने के दौरान तस्करी की संभावना बनी रहती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में भी पशुओं के चिह्नीकरण (टैंगिंग) का पशुपालक को प्रमाण पत्र दिया जाएगा, इससे काफी हद तक तस्करी की घटनाओं में रोकथाम लग सकेगी।
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