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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है पार्थेनियम

Udham singh nagar

Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
पंतनगर। पार्थेनियम अर्थात् गाजर घास स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है। यह खरपतवार कुल का पौधा है। घरों एवं क्यारियों के आसपास और अकृषित भूमि के अलावा वेस्टइंडीज, दक्षिणी और उत्तरी अमेरिका के उष्ण भागों में यह बड़ी संख्या में पाया जाता है। यह मैक्सिको से लाल गेहूं पीएल-480 के साथ भारत आया था। इस पौधे का देश में सभी जगह तेजी से विकास हो रहा है। आज यह भारत के लगभग पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैल चुका है। यह अनिष्टकारी पौधा पूरे देश के लिए काफी खतरनाक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पार्थेनियम को गजरी, गाजर घास, चटक चांदनी, गंधी बूटी और पंधारी नामों से जाना जाता है।
पार्थेनियम एक शाकीय पौधा है, जो 90 सेमी से लेकर एक मीटर तक ऊंचा होता है, इसकी पत्तियां गाजर या गुले दाऊदी की पत्तियों की तरह होती हैं, इसमें सफेद रंग के छोटे-छोटे फूल लगते हैं। फूल और बीज हर मौसम में दिखाई पड़ते हैं। इसके बीजों की सुसुप्तता आठ साल तक रहती है।
पार्थेनियम को नष्ट करने के लिए इसे फूल आने से पहले ही जड़ से उखाड़ कर खत्म देना चाहिए। गिने चुने पौधों को हाथ से उखाड़ देना चाहिए। अधिक क्षेत्र में होने पर हाथों में दस्ताने अवश्य पहनें, ताकि यह शरीर के सीधे संपर्क में न आए। जड़ से न उखाड़कर दरांती से काटने से पार्थेनियम तेजी से बढ़ता है, इसलिए इसे जड़ से उखाड़कर, जैविक विधि या रसायनिक उपचार करके ही खत्म किया जा सकता है। इसे समूल नष्ट करने के लिए मैक्सीकन बीटल नामक कीड़े को भी इसके झुंडों में छोड़ा जाता है, क्योंकि मैक्सीकन बीटल केवल पार्थेनियम को ही खाता है, इसलिए इससे फसलों को नुकसान पहुंचने की कोई संभावना नहीं रहती है।

क्या होता है नुकसान
पार्थेनियम के कारण मनुष्य में चर्म रोग हो जाते हैं। इसके कारण गर्दन, चेहरे और बांहों की चमड़ी सख्त होकर फट जाती है, उसमें घाव भी बन जाते हैं। पौधों के संपर्क में आने से खाज, खुजली पैदा होती है, इसके फूल, बीज और पौधे पर मौजूद रोएं से दमा, रिन्ही टायटीश और हेफीवर जैसी बीमारियां पैदा होती हैं। यह मनुष्य के नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर उसे डिप्रेशन का शिकार भी बना देता है।

गाजर घास उन्मूलन के लिए कमर कसी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से जनपद ऊधमसिंह नगर में 22 अगस्त तक पार्थेनियम उन्मूलन सप्ताह मनाया जा रहा है। सप्ताह के अंतर्गत मैक्सीकन बीटल गाजर घास के पौधों पर छोड़ रहे हैं। विद्यालयों एवं पंचायत घरों में गाजर घास उन्मूलन जागरूकता के लिए गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
-डा.वीरेंद्र प्रताप सिंह, खरपतवार विशेषज्ञ (पंत विवि)
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