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महाविद्यालय है या बकरीबाड़ा

Udham singh nagar

Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
खटीमा। जनप्रतिनिधियों की अदूरदर्शिता एवं छात्रहितों की अनदेखी का खामियाजा महाविद्यालय को भुगतना पड़ रहा है। महाविद्यालय जहां प्रोफेसर एवं अन्य स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, वहीं यहां अव्यवस्थाओं का अंबार लगा है। महाविद्यालय को लोगों ने पशुशाला बनाकर रख दिया है और कालेज आने वाले मुख्य मार्ग के छात्रों ने बाइक स्टैंड बनाकर आम नागरिकों के लिए परेशानियां पैदा की हैं। महाविद्यालय की हालत देखकर लगता है कि जुलाई, अगस्त में महाविद्यालय के हितों के लिए संघर्ष करने वाले छात्र नेता मात्र चुनावी राजनीति के लिए आंदोलन करते हैं।
वर्ष 1988 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने थारु जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की, इसकी शुरुआत पांच कमरों से हुई थी बाद में विशाल भवन का निर्माण भी तिवारी एवं पूर्व सांसद सत्येंद्र चंद्र गुड़िया के प्रयास से संभव हुआ। इससे पहले महाविद्यालय चार माह तक राणा प्रताप इंटर कालेज में संचालित होता रहा। महाविद्यालय की शुरुआत में छात्र-छात्राओं की कुल संख्या लगभग डेढ़ सौ थी, तब महाविद्यालय में पांच विषय रखे गए थे, पांचों विषयों के प्रोफेसर महाविद्यालय में थे। आज महाविद्यालय को 24 वर्ष पूरे हो गए हैं, बावजूद इसके महाविद्यालय की हालत नहीं सुधरी है।
वर्तमान में महाविद्यालय में छात्र संख्या आठ हजार से अधिक हो गई है, लेकिन महाविद्यालय में न तो छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त कक्षाएं हैं और न ही पढ़ाने को प्रोफेसर। शिक्षण कार्य का जिम्मा 11 प्रोफेसरों पर है, जबकि जरूरत के अनुसार लगभग 100 प्रोफेसर महाविद्यालय में होने चाहिए। कक्षाएं मात्र छह कमरों में संचालित होती हैं। तीन दर्जन कमरों की आवश्यकता और है। महाविद्यालय का पुराना भवन बकरीबाड़ा बन चुका है। महाविद्यालय के अन्य कमरों की हालत भी बेहद दयनीय है। महाविद्यालय के मुख्य द्वार से अव्यवस्थाएं शुरू हो जाती हैं। छात्रों की बाइकें स्टैंड के बजाय सड़कों पर खड़ी रहती हैं, जिससे इसके आसपास के अन्य विद्यालयों को आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं के साथ ही आम जनता को भी भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।


चपरासी तक नहीं हैं महाविद्यालय में
महाविद्यालय के प्राचार्य पीएस नेगी ने कहा महाविद्यालय में विद्यालय में एक चपरासी तक नहीं है, शैक्षणिक स्टाफ तो दूर की बात है। स्टाफ की कमी के लिए शासन को लिखा गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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