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काशीपुर शुगर मिल के चलने की संभावना कम

Udham singh nagar

Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
काशीपुर। जिले की सबसे पुरानी मिलों में से एक काशीपुर शुगर मिल के आगामी पेराई सत्र में चलने की संभावना कम ही नजर आ रही है। क्षमता के अनुसार गन्ना नहीं मिलने से मिल को भारी घाटा हो रहा है। मिल के प्रधान प्रबंधक राजीव अग्रवाल ने सहायक गन्ना आयुक्त रामबदर वर्मा को आगामी सीजन में मिल चलाने का कोई आश्वासन नहीं दिया। अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि सरकार अगर मिल को विशेष पैकेज देती है तो मिल चलाने पर विचार किया जा सकता है।
काशीपुर शुगर मिल की पेराई क्षमता 4000 (टीसीडी) है। बीते पेराई सत्र में मिल ने 25.45 लाख कुंतल गन्ने की पेराई की और 221090 कुंतल चीनी उत्पादन किया, परंतु अब मिल प्रबंधकों का मिल चलाने का इरादा नजर नहीं आता है। सभी चीनी मिलों में कई दिनों से सालाना मरम्मत का काम जारी है, परंतु काशीपुर शुगर मिल में मशीनरी की मेंटिनेंस तो दूर साफ-सफाई भी नहीं हुई है। मिल परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग रही है। सहायक गन्ना आयुक्त रामबदर वर्मा ने मिल का निरीक्षण करने के बाद गन्ना विकास विभाग को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें उन्होंने कहा 31 जुलाई 2012 को काशीपुर शुगर मिल के निरीक्षण में देखा गया कि आगामी पेराई सत्र के लिए मिल में कोई तैयारी और मिल की मरम्मत नहीं की जा रही है।
प्रधान प्रबंधक राजीव अग्रवाल तथा गन्ना प्रबंधक अशोक कुमार श्रीवास्तव से बात करने पर प्रतीत हुआ कि वह मिल चलाने के इच्छुक नहीं हैं। रिपोर्ट में लिखा है कि प्रधान प्रबंधक अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है अगर सरकार कोई पैकेज देती है तो ही मिल चलाने पर विचार किया जा सकता है।

नौ साल से चल रही थी बंदी की तैयारी
काशीपुर। काशीपुर शुगर मिल मालिकों ने नौ साल पहले से ही मिल को बंद करने की योजना बना ली थी। औद्योगिक वित्तीय पुनर्वास परिषद (वीएफआर) ने वर्ष 2003 में ही काशीपुर शुगर मिल को बीमार घोषित कर दिया था। मिल प्रबंधकों ने 23 मई 2012 को उत्तराखंड सरकार के पास मिल क्लोजर का अनुमति प्रार्थना पत्र लगाया था, जिस पर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया।

काशीपुर शुगर मिल के प्रधान प्रबंधक अग्रवाल को किसानों के हित में मिल चलाने के लिए मरम्मत एवं रिपेयरिंग का कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए हैं।
-रामबदर वर्मा, सहायक गन्ना आयुक्त

मिल को पिछले कई पेराई सत्रों से लगातार करोड़ों का घाटा हो रहा है, जिससे मिल की वित्तीय स्थिति खराब है। मिल पर किसानों का लगभग 23 करोड़ रुपया बकाया है।
-राजीव अग्रवाल, प्रधान प्रबंधक
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