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नौकायन के लिए 70 फीसदी लाइसेंस राज्यवासियों को

Tehri

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
टिहरी बांध की विशाल झील के नीचे बेशक एक शहर और कई गांव दफन हैं। यह एक त्रासदीपूर्ण सत्य है। बावजूद अब उससे उभर कर आगे बढ़ने की जरूरत है। इस विशाल जल राशि से भविष्य के रास्ते तलाशने हैं। ताकि लोगों के चेहरों पर सुख और समृद्धि की मुस्कान आ सके। इस झील का उपयोग जहां मछली पालन के लिए किया जा सकता है, वहीं लोगों के लिए बोटिंग के जरिये आर-पार जाने के नए रास्ते भी बन सकते हैं। बोटिंग भी रोजगार का नया विकल्प बन सकता है। यहां नैनीताल और श्रीनगर की डल झील की तर्ज पर बोटिंग की जा सकती है। यही नहीं इससे पिलखी से लेकर चिन्यालीसौड़ के बीच एक नया जलमार्ग भी विकसित हो सकता है। पूर्वोत्तर राज्यों में ब्रह्मपुत्र नदी पर ऐसी व्यवस्था है। झील में मछली पालन और नौकायन के क्षेत्र में सरकारी प्रयास अब आगे बढ़ने लगे हैं। जिसका निश्चय ही स्वागत होना चाहिए।
नई टिहरी। टिहरी बांध की झील में व्यवसायिक बोट संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने को लेकर गठित उपसमिति ने 70 फीसदी लाइसेंस राज्य के निवासियों देने का निर्णय लिया। इस अवसर पर प्रथम चरण में दस बोटों के लाइसेंस और एक लाइसेंस पर एक ही बोट का संचालित करने पर भी सहमति बनी।
जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जल्द झील में व्यवसायिक बोटों के संचालन के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। जोत सिंह बिष्ट एवं रजनी सजवाण ने चंबा-धरासू मार्ग के खेतू नामक स्थान पर झील में संचालित बोटों पर नजर रखने के लिए वाच टावर स्थापित करने का सुझाव दिया। वहां 32 लाख रुपये की सम विकास योजना से व्यू-प्वांइट का निर्माण भी किया जा चुका है। निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में 30 और 70 सीटर की दस बोटों के लाइसेंस जारी किए जाएं। सीडीओ सविन बंसल ने कहा कि उपसमिति की अगली बैठक 15 दिन के अंदर होगी। जिसके बाद लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में जाखणीधार के प्रमुख जगदंबा रतूड़ी, एसडीएम संतोष पांडेय, पुनर्वास के ईई आरके तिवारी, सीओ आरसी जोशी, पर्यटन अधिकारी जसपाल चौहान, अपर मुख्याधिकारी राजीव नाथ त्रिपाठी, आनंद व्यास, मूर्ति नेगी, पिंगल दास, जीतरात भट्ट, एसके राय, एसएस कठैत आदि मौजूद थे।

मिलेगा रोजगार
टिहरी बांध बनने के बाद से ही प्रतापनगर प्रखंड अलग-थलग पड़ गया है। व्यावसायिक स्तर पर बोटिंग चलेगी तो लोगों को आर-पार जाने में सुविधा मिलेगी। इससे आसपास में होटल व्यवसाय भी विकसित हो सकता है। इस तरह होटल और बोटिंग के जरिये कई लोग सीधे रोजगार से जुड़ेंगे।

बन सकता है जलमार्ग
टिहरी बांध की झील पिलखी से लेकर चिन्यालीसौड़ तक करीब 42 वर्ग किमी तक फैली है। अगर पिलखी से चिन्यालीसौड़ के बीच जलमार्ग बनाकर सीधी बोट सेवाएं संचालित की जाए, तो इससे पर्यटन को खूब बढ़ावा मिलेगा। लोग इसके जरिये झील में घूम सकेंगे। साथ ही स्थानीय लोग एक सौ किमी के सड़क मार्ग से जाने के बजाय इससे आ जा सकेंगे।

आपदा में ही महत्वपूर्ण
टिहरी बांध की झील आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 2010 में जब टिहरी जिले में कई संड़कें अवरुद्ध हो गई थी, तो तब राहत और बचाव के कार्य झील के जरिये मोटर बोट से ही किए गए थे। तब चिन्यालीसौड़ में फंसे तीर्थयात्रियों को बोटिंग के माध्यम से कोटी कालोनी पहुंचाया गया था। झील के उस पार के गांवों में बीमार एवं प्रसूता महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में भी मोटर बोट कारगर हो सकती है। हालांकि ऐसी व्यवस्थाएं पहले भी चल रही है। लेकिन वह सरकारी व्यवस्था थी। जो नियत समय पर ही चलती थी। प्राइवेट स्तर पर बोटिंग होने से लोगों को हर समय बोट उपलब्ध रहेगी।


मत्स्य व्यवसाय से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
पर्यटक उठा सकेंगे एंगलिंग का लुत्फ
- मत्स्य व्यवसाय के लिए प्राथमिक तौर पर 20 प्वाइंट चिह्नित
- मत्स्य विभाग ने तीन करोड़ 23 लाख 69 हजार तैयार किया प्रस्ताव
नई टिहरी। टिहरी बांध की विशाल झील में जल्द ही मत्स्य व्यवसाय से रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। योजना को मूर्त रूप देने के लिए मत्स्य विभाग ने एक रिपोर्ट तैयार कर रोजगार और पर्यटन विकास का खाका तैयार किया है। जिसमें प्राथमिक तौर पर मत्स्य व्यवसाय के लिए 20 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। इसके साथ ही झील में मिलने वाली सहायक नदियों और गदेरों में पर्यटक एंगलिंग (डोरी से मछली पकड़ना)का लुत्फ भी उठा सकेंगे।
वर्ष 2005 में झील भरने के बाद से ही मत्स्य आखेट की संभावनाएं तलाशने की मांग उठती रही। लंबे इंतजार के बाद डीएम ने मत्स्य विभाग को मत्स्य और पर्यटन व्यवसाय की कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेेदारी सौंपी है। प्राथमिक सर्वे में मत्स्य व्यवसाय और एंगलिंग के लिए 20 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं। जिसे स्थानीय स्तर पर गठित समितियों के माध्यम से आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है। व्यवसाय शुरू करने को आधारभूत ढांचा एंगलिंग स्थल, पहुंच मार्ग और जलाशय के समीप तौल केंद्रों की स्थापना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मत्स्य विभाग ने तीन करोड़ 23 लाख 69 हजार का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

125 टन मत्स्य उत्पादन की संभावना
झील और झील में समाहित होने वाली जलधाराओं में यूं तो साइजोथोरेक्स, महाशीर, गारा,वेरीलियस, निमेकिलस, मास्टासेंबिलस आदि प्रजातियाें के मौजूद होने की संभावना है, लेकिन प्राथमिक स्तर पर किए गए सर्वे के मुताबिक झील में साइजोथोरेक्स, महाशीर, कॉमनकार्प और ग्रासकार्प प्रजाति की अधिकता पाई गई है। झील में प्रतिवर्ष 125 टन मत्स्य उत्पादन से 87.50 लाख की आय होने का अनुमान है।

कोट-
झील में मत्स्य व्यवसाय शुरू कराने के लिए फिलहाल प्राथमिक तौर पर सर्वे किया गया है। जिसमें जगह का चिह्नीकरण से लेकर व्यवसायियों को बाजार उपलब्ध कराने और आखेट के लिए वोट और अन्य सुवधाएं तथा प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था का खाका तैयार किया गया है। -गणेश जोशी, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक टिहरी।

टिहरी बांध की झील में जलक्रीड़ा के साथ ही मत्स्य व्यवसाय शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए मत्स्य विभाग से सर्वे कराया गया है। इसके बाद आवंटन प्रक्रिया शुरू करने से पहले जरूरी सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। कार्ययोजना को धरातल पर उतारने से पहले शीघ्र ही जनप्रतिनिधियों की बैठक कर सुझाव मांगे जाएंगे।
-डा. रंजीत सिन्हा, डीएम टिहरी।
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