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मलबे में दबे हो सकते है और कंकाल

ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग

Updated Wed, 19 Oct 2016 09:50 PM IST
May be buried in the rubble and skeletons.

नर कंकालPC: demo pic

त्रियुगीनारायण-केदारनाथ वैकल्पिक पैदल मार्ग पर नर कंकाल मिलने के बाद अब केदारनाथ धाम में जमे मलबे में भी कंकाल दबे होने की आशंका जताई जा रही है। धाम में मलबे की सफाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। आपदा से धाम और केदारपुरी में 12 से 15 फीट तक मलबा जमा है, जिसको अभी तक साफ नहीं किया गया है, जिसमें सैकड़ों कंकालों के दबे होने की आशंका है।
16/17 जून 2013 की आपदा से प्रभावित केदारनाथ मंदिर को छोड़कर केदारपुरी में मलबे की सफाई नहीं हुई है। मंदिर परिसर के आगे से लेकर पुल तक अब भी कई फीट मलबा जमा है। वहीं मंदिर के पीछे वाले क्षेत्र से लेकर सरस्वती और मंदाकिनी नदी के किनारे मलबा व बोल्डर पड़ा हुआ है, जो धाम की वास्तविक सतह से कई फीट ऊपर हैं। इस मलबे में कंकालों के दबे होने से इंकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वर्ष 2014 और 2015 में मंदिर से कुछ ही दूरी पर कंकाल के अवशेष मिले हैं।

सरकार द्वारा आपदा के बाद से मंदिर, परिसर और उसके चारों तरफ पांच से दस फीट की दूरी तक ही मलबे की सफाई की गई है। केदारपुरी की सफाई को लेकर आज तक शासन स्तर पर कोई प्लानिंग नहीं बन पाई है, जबकि तीर्थ पुरोहित समाज व जनप्रतिनिधि निरंतर केदारनाथ धाम में जमा मलबे की सफाई की मांग करते आ रहे हैं।

केदारनाथ के वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोश्ती, युवा कल्याण परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश बगवाड़ी, केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि धाम व केदारपुरी की वृहद सफाई जरूरी है। इस कार्य से जहां नर कंकालों को लेकर बना संशय पूरी तरह से साफ हो जाएगा। वहीं केदारपुरी को मास्टर प्लान के साथ बसाने के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध हो जाएगी। लेकिन इस दिशा में नहीं सोचा जा रहा है।

मलबे की सफाई को नहीं हुई प्लानिंग
रुद्रप्रयाग। निम के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल का कहना है कि पुनर्निर्माण को लेकर जो निर्देश मिले, उसी के तहत कार्य किया गया। आपदा के बाद पहली प्राथमिकता मंदिर पहुंचने की थी, उसके लिए त्वरित वैकल्पिक मार्ग बनाया गया। इसके बाद रामबाड़ा से केदारनाथ स्थायी मार्ग का निर्माण किया गया। इसके बाद मंदिर की सुरक्षा व अन्य कार्य किए गए। काफी हद तक मलबे की सफाई भी की गई है। लेकिन केदारपुरी की सफाई के लिए न दिशा-निर्देश मिले और न ही कभी चर्चा हुई।

3886 यात्री आज भी लापता
रुद्रप्रयाग। 16/17 जून को केदारनाथ में आई आपदा के बाद कई यात्री व स्थानीय लापता हुए। सरकार द्वारा जब-जब रेस्क्यू अभियान चलाए गए, लापता लोगों के मिलने की आस में कई प्रभावितों ने केदारघाटी के चक्कर भी लगाए। लेकिन आज तक कई यात्रियों का पता नहीं लग पाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1840 गुमशुदगी रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। पुलिस द्वारा खोजबीन के बाद 1256 रिपोर्ट सही पाई गई, जिसमें 3886 लोग लापता पाए गए, जिनका पता नहीं लग पाया है।

646 कंकाल मिल चुके
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ आपदा में अब तक 646 कंकाल मिल चुके हैं। आपदा के कुछ बाद बाद रेस्क्यू अभियान बंद करने पर पुलिस के रिकार्ड में 613 मृत और कंकाल बरामद हुए थे। जबकि 33 नर कंकाल त्रियुगीनारायण-केदारनाथ ट्रैक पर विगत सोमवार को मिले है।
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