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हजारों शिशुओं पर भारी एएनएम की हड़ताल

Rudraprayag

Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
गढ़वाल। पिछले 52 दिनों से जारी मातृ शिशु परिवार कल्याण महिला कर्मचारी एसोसिएशन (एएनएम) की हड़ताल हजारों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं पर भारी पड़ रही है। हड़तालियों और शासन की खींचतान के चलते बड़ी संख्या में नवजात शिशु प्रतिरक्षण के लाभ से वंचित हो जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को भी मेडिकल संबंधी जरूरी सेवाएं और सलाह नहीं मिल पा रही है। इनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी 20 जनवरी को आयोजित होने वाला पल्स पोलियो अभियान प्रभावित हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं की जांच और टीकाकरण के साथ ही बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की आयु तक निश्चित समय पर बीसीजी, डीपीटी, हैपेटाइटिस बी, खसरा, पोलियो आदि के टीका और विटामिन आदि की खुराक देने का कार्य एएनएम के ही जिम्मे है। गांवों में तो स्वास्थ्य सेवाएं एएनएम के ही भरोसे हैं। विभिन्न रोगों से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण जरूरी होता है। हड़ताल के चलते टीकाकरण नहीं होने से उत्तरकाशी जिले में ही 0-5 वर्ष आयु वर्ग के 45,760 बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। तकरीबन यही स्थिति प्रदेश के हर जिले में है।
इनसेट
हड़ताल से एमसीटीएस ठप
रुद्रप्रयाग। मातृ-शिशु एवं परिवार कल्याण कर्मियों की हड़ताल से एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) के कार्यक्रम पूरी तरह से ठप हैं। ग्रामीण इलाकों में नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत करने के लिए चलाए जा रहे एमसीटीएस भी बंद हो गया है। आन लाइन डाटा फीडिंग नहीं होने से विभाग को गर्भवती महिलाओं और प्रसवों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। एएनएम ही गांवों में जाकर गर्भवती महिलाओं को रजिस्टर्ड करती हैं। एएनएम ही गर्भवती महिलाओं का विवरण ब्लाक देती हैं, जहां महिला का आन लाइन रजिस्ट्रेशन किया जाता है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएचम हिमांशु नौडियाल स्वीकारते हैं कि हड़ताल के कारण गांवों से ब्लाक में सूचनाएं नहीं आ रही हैं।
कोट
एएनएम की ओर से वर्ष 1979 से एरियर के भुगतान की मांग की जा रही है, जो औचित्यपूर्ण नहीं है। मसले पर उच्च स्तर पर मंत्रणा चल रही है। प्रतिरक्षण के लिए किसी दूसरे विकल्प का जोखिम नहीं उठाया जा सकता।
डा. एके सिंह, सीएमओ, पौड़ी
कोट
शासन की उदासीनता के कारण बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। सप्ताह में प्रत्येक बुधवार को चिकित्सा केंद्रों में हजारों बच्चों पर जीवन रक्षक टीके लगाए जाते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों से माताओं को बैरंग लौटना पड़ रहा है। बच्चे प्रतिरक्षण से वंचित हो रहे हैं।
- विजय लक्ष्मी पंवार, एसोसिएशन की पौड़ी जिलाध्यक्ष
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