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सड़कें दुरुस्त न अस्पताल चाक-चौबंद

Rudraprayag

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
केस 1: मंदाकिनी घाटी के तनकिला गांव में एक नव विवाहिता भवन की तिबारी (दरवाजे) पर बैठकर रो रही है। परिजनाें ने बताया कि वह एक सप्ताह से बीमार है। पेट में दर्द और तेज बुखार है। दवाइयों का असर असर नहीं हो रहा है। सड़क बंद होने से उसे इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं ले जा पा रहे हैं।
केस 2: पीएचसी ऊखीमठ से वापस लौट रहे वायरल फीवर से पीड़ित तीन मरीज। पूछने पर बताते हैं कि डाक्टर काम से बाहर गए हैं। यदि कुंड-ऊखीमठ रोड खुली होती, तो अगस्त्यमुनि या रुद्रप्रयाग अस्पताल में उपचार करा पाते।

गुप्तकाशी/ऊखीमठ। ये दो ऐसे उदाहरण हैं, जो पूरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब तक सड़कें दुरुस्त नहीं की जा सकी हैं। आपातकालीन स्थितियां होने के बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अन्य चिकित्सक तैनात करने तो दूर, जो हैं भी उनसे भी ठीक से काम नहीं लिया जा रहा है। उनके ऊपर अतिरिक्त दायित्व भी हैं, जिनसे वे अस्पताल को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। यह स्थिति आपदा प्रबंधन की पोल खोलती हैं।
पीएचसी में प्रभारी चिकित्साधिकारी प्रथम, चिकित्साधिकारी द्वितीय, एक डेंटल सर्जन और एक महिला चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं। महिला चिकित्सक को छोड़कर सभी पदों पर तैनातियां हैं। लेकिन प्रभारी चिकित्साधिकारी के पास डिप्टी सीएमओ का चार्ज भी है। जिससे उनका ज्यादातर समय मीटिंगों या विभागीय कार्यों में गुजरता है। एक चिकित्सक की मानसिक स्थिति ठीक न होने से उन्हें अन्यत्र अटैच्ड किया गया है। हालांकि इस बारे में विभाग ने निदेशालय को भी अवगत कराया है। ऐसे में कागजों पर डाक्टर होते हुए भी अस्पताल में डाक्टराें की कमी है। उन्हें भी कभी किसी काम से अन्यत्र जाना पड़ा तो मरीजों का बैरंग लौटना स्वाभाविक है। कुछ मरीजों ने बताया कि अस्पताल में कभी दवाइयां मिल भी रही हैं, तो वे एक्सपायरी डेट की हैं। 13/14 और 15 सितंबर को हुई आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कें अब तक दुरुस्त नहीं की जा सकी हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य यशोदा देवी और फते सिंह ने बताया कि प्रशासन सड़कें खोलने के लिए युद्ध स्तर पर काम नहीं कर रहा है। जिससे बीमार व्यक्तियों को हायर सेंटर नहीं ले जा पा रहे हैं।

विभागीय कार्य निपटाने के बावजूद अस्पताल को भी समय देता हूं। हमारा कार्य स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा लिखना है। दवाई देना फार्मेसिस्ट का कार्य है। एक्सपायरी दवाइयों के संबंध में फार्मेसिस्ट को अवगत कराना चाहिए। डा. आरपी सिंह, प्रभारी चिकित्सक पीएचसी
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