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किसी ने रोका, न किसी ने देखा

Rudraprayag

Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
रुद्रप्रयाग। जिले में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामले में इसी माह नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से सख्त रवैया अपनाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में तो आया है, लेकिन इससे पहले यहां दर्जनों ऐसे भवनों का निर्माण हो गया है, जो मानकों पर जरा भी खरे नहीं उतरते हैं।
जिला मुख्यालय के पास पिछले कुछ वर्षों में ऐसे बहुमंजिले भवन खडे़ किए गए हैं जो मानकों के विपरीत हैं। यहां चार से पांच मंजिला भवनों का निर्माण हो गया है। वहीं जो भवन मानकोनुसार बने भी हैं उनके चारों ओर जगह ही नहीं छोड़ी गई है। भवनोें को दूसरे भवनों से सटाकर बना दिया गया है। नालियों, हवा और प्रकाश के लिए जगह नहीं छोड़ी है। जबकि 9.0 मी. से ऊंचे भवनों के चारों ओर न्यूनतम 4.50 मी. क्षेत्र को निर्माण मुक्त रखते हुए खुला छोड़ना चाहिए। संपर्क मार्ग की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन यहां भी मानकों की धज्जियां उड़ा दी गई। पहाड़ में इतने ऊंचे भवनों का निर्माण किया गया मगर यहां मानकों को न देखा गया और न किसी ने इस निर्माण पर सवाल उठाए। भवन निर्माण बिना नक्शा पास कराए बनाए गए लेकिन किसी ने उन्हें नहीं रोका। यदि नक्शा पास कराया है, तो मानकों के विपरीत भवनों का निर्माण कैसे हुआ।

इंसेट
2007 में मानक किए थे निर्धारित
छह नवंबर 2007 को उत्तराखंड शासन ने भवन निर्माण उपविधियों/विनियमों में भवनों की ऊंचाई, भू-आच्छादन, एफएआर, पार्किंग संबंधी मानकों में संशोधन संबंधी आदेश जारी कर पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र में मानक निर्धारित किए थे।

क्या होनी चाहिए भवन की ऊंचाई
भवन की ऊंचाई पर्वतीय क्षेत्र में 12 मीटर (40 फीट) और मैदानी क्षेत्रों में 21 मीटर (69 फीट) यानी कि पर्वतीय क्षेत्रों में तिमंजले तक ही भवन होने चाहिए, इससे ज्यादा नहीं। वहीं बदरीनाथ और केदारनाथ में भवनों की ऊंचाई 8.5 मी. और गंगोत्री में 6.5 मी. निर्धारित की गई है। पर्वतीय क्षेत्र में 7.5 मी. से ऊंचाई वाले भवन बनाने के लिए पहले इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है कि निर्माण स्थल भूगर्भीय दृष्टिकोण से उपयुक्त है या नहीं। प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आईआईटी रुड़की/पंतनगर विश्वविद्यालय के स्ट्रक्चरल डिजायन विशेषज्ञ अधिकृत हैं।

भवन हो रहे चिह्नित
मानकों के विरुद्ध निर्मित भवनों का चिह्नांकन किया जा रहा है। प्रक्रिया पूर्ण होने पर नोटिस भेजे जाएंगे। - डा. ललित नारायण मिश्र, नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र/एसडीएम सदर।
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