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महाप्रबंधक हैं पर सहायक अभियंता नहीं

Pithoragarh

Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
पिथौरागढ़। सियासतदान आरोप लगाते हैं कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है। आरोप सही है या नहीं ये बहस का विषय हो सकता है। मगर अधिकारियों के हावी रहने का आलम इस जिले में भी है। आम लोग पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, लेकिन जल संस्थान के हाल बेढंगे हैं। शीर्ष स्तर पर तो अधिकारियों की भरमार है मगर निचले स्तर पर काम चलाने भर के भी इंजीनियर नहीं है। हाल यह है कि पिथौरागढ़ में एक भी सहायक अभियंता नहीं है और इन सबका असर जिला मुख्यालय की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
लोगों को पानी मिले या न मिले जल संस्थान में अफसरों की फौज कम नहीं है। पिथौरागढ़ में ही अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और महाप्रबंधक तक तीन उच्च अधिकारी हैं। इन तीनों कार्यालयों में कर्मी भी काफी है। तीन-तीन आला अफसर विभाग की शोभा तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन महकमे के पास निचले स्तर के अधिकारियों की खासी कमी है। पिथौरागढ़ डिवीजन में मात्र एक जूनियर इंजीनियर है और सहायक अभियंता तो एक भी नहीं है। सहायक अभियंता के सभी पद रिक्त हैं।
योजनाओं की मरम्मत से लेकर रखरखाव तक की असल जिम्मेदारी इन्हीं निचले स्तर के अधिकारियों की होती है, लेकिन उनके ज्यादातर पदों के रिक्त होने से हालात ठीक नहीं है। जमीनी स्तर के अधिकारियों की कमी के चलते पेयजल व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। लीकेज दुरुस्त करने, मरम्मत, टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति समेत योजनाओं के संचालन और व्यवस्था बनाए रखने में विभाग को दुश्वारी आ रही है। पेयजल वितरण को संवारने में भी इसका असर पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी भी इस तथ्य को स्वीकारते हैं। जल संस्थान पिथौरागढ़ डिवीजन के अधिशासी अभियंता वीके मिश्रा का कहना है कि स्टाफ कम होने से कामकाज पर असर पड़ना लाजमी है। पर बावजूद इसके काम प्रभावित न हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही रिक्त पदों पर तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है। क्षेत्र को मुख्य रूप से घाट, ठुलीगाड़, रईगाड़, भैलोत, नैनीपातल एवं मैलापोखरी से पेयजल की आपूर्ति होती है। वैसे जिला मुख्यालय में ही हर रोज 11.50 लाख लीटर पानी की जरुरत है। पर उपलब्धता इस समय एक तिहाई से भी कम है।
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