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घाटे पर चल रहे फार्मों में होंगे शोध कार्य

Pauri

Updated Tue, 28 Jan 2014 05:47 AM IST
पौड़ी। उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार प्रदेश में बदहाल हो गए कृषि फार्मों को नई शक्ल देगा। विवि इन फार्मों को शोध एवं प्रसार कार्यों के लिए उपयोग करेगा। इसके लिए विवि ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद विवि इन बदहाल कृषि फार्मों को जीवंत बनाने की दिशा में कदम उठाएगा।
राज्य में नौथा और रुद्रप्रयाग सहित कई कृषि फार्म घाटे में चल रहे हैं। विश्वविद्यालय की ओर से कुछ समय पहले कैंपटीफाल क्षेत्र के नौथा स्थित कृषि फार्म का निरीक्षण किया गया। इस फार्म को शोध एवं प्रसार कार्य के लिए उपयुक्त पाया गया है। विवि ने माना कि प्रदेश में ऐसे कई कृषि फार्म हैं, जो विभिन्न कारणों से या तो निष्प्रयोज्य पड़े हैं या वे घाटे में चल रहे हैं। ऐसे सभी फार्मों को चिह्नित करने के बाद विवि उन्हें भी अपने हाथों में लेने का प्रस्ताव भेजेगा। इस फार्मों में विवि में चल रहे शोध कार्यों को अमलीजामा पहनाया जाएगा।

विवि कई संस्थान खोलेगा
विवि चिरबटिया में पर्वतीय कृषि महाविद्यालय स्थापित करेगा। गैरसैण में औषधीय एवं सगंध फल संस्थान बनाया जाएगा। माजरी ग्राउंड डोईवाला में खाद्य विज्ञान एवं टैकभनोलॉजी संस्थान की स्थापना होगी। विवि युवाओं को प्रशिक्षण देकर उद्यमी तक पहुंचाने के लिए अभियान भी चलाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं, युवतियों को बागवानी में प्रशिक्षित कर उनका कौशलवर्द्धन किया जाएगा।

आपदा प्रभावितों को वितरित होंगे पेड़
उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि प्रदेश में दैवी आपदा से ग्रसित क्षेत्र में आपदा की चपेट में आए बागानों में जाकर प्रभावितों को निशुक्ल पेड़ उपलब्ध कराएगा। विवि के कुलपति ने कहा कि इसके तहत करीब 20 हजार से अधिक पेड़ वितरित किए जाएंगे।

कोट-
विवि ने प्रदेश में घाटे में चल रहे कृषि फार्मों को अपने अधीन लेकर उनमें शोध एवं प्रसार कार्य करने का शासन को प्रस्ताव भेजा है। विश्वविद्यालय की परिनियमावली पास हो गई। 14 दिन में यह पटल में रखी जानी है। इसके साथ ही विवि का बोर्ड आफ मैनेजमेंट विधान सभा में पारित हो गया है। अब विवि सीधे भर्ती कर सकेगा। - डा.मैथ्यू प्रसाद, कुलपति उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार


धनोल्टी और मंगार उद्यान बदहाल
नई टिहरी। देखरेख के अभाव में जिले के धनोल्टी और मंगार थत्यूड़ राजकीय उद्यानों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। धनोल्टी में स्थित दूसरे उद्यान में सेब, आडू, पोलम के पौधों की नर्सरी है। मंगार थत्यूड़ उद्यान में भी सिर्फ सेब और आडू के पौधे तैयार किए जाते है। इन उद्यानों में जड़ी-बूटी उत्पादन करने, शोध व अन्य विकास की योजनाएं संचालित करने की जिला उद्यान विभाग की फिलहाल कोई योजना नहीं है। जिला उद्यान अधिकारी हितपाल सिंह ने बताया कि धनोल्टी और मंगार थत्ययूड़ उद्यान में पौध तैयार कर काश्तकाराें को उनका वितरण किया जाता है।

बंजर खेत हुए आबाद
नई टिहरी। धनोल्टी का आलू फर्म उद्यान विभाग ने जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए चार वर्ष पहले जड़ी-बूटी शोध संस्थान को दिया था। हालांकि जड़ी-बूटी शोध संस्थान ने जिस उद्देश्य के साथ यह फर्म लीज पर लिया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है। पानी की कमी से वहां जड़ी-बूटी का उत्पादन बहुत कम हो रहा है। वर्तमान में इस फर्म में काला जीरा और कूट का उत्पादन किया जा रहा है। यह जरूर है कि जड़ी-बूटी शोध संस्थान ने फर्म के बंजर पडे़ खेतों का आबाद कर लिया है।

जिले में अब एक भी कृषि फार्म नहीं
उत्तरकाशी। क्षेत्र की आबोहवा में बीजों के अनुकूलन, बीज उत्पादन एवं किसानों को कृषि संबंधी जानकारी मुहैया कराने के उद्देश्य से जिले में करीब 22 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित कृषि फार्म अब अस्तित्व खो चुके हैं। चिन्यालीसौड़ का कृषि विज्ञान केंद्र तथा सिरोर फार्म पुलिस विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है।
कृषि विभाग का 12.6 हेक्टेयर में फैला चिन्यालीसौड़ स्थित फार्म वर्ष 2002 में कृषि विज्ञान केंद्र को हस्तांतरित कर दिया गया। पहले इस फार्म में कृषि विभाग सिर्फ बीजों के अनुकूलन का परीक्षण एवं बीज उत्पादन करने के साथ ही यहां किसानों को कृषि तकनीकों से भी रूबरू कराता था। सिरोर में 9.28 हेक्टेयर वाले कृषि फार्म की जमीन रेतीली होने से यह कभी उपयोगी नहीं रहा। वर्ष 2010 में शासन ने कृषि फार्म के नफे नुकसान की रिपोर्ट मांगे जाने पर तत्कालीन मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह ने इस फार्म के कभी फायदे में न आ सकने की रिपोर्ट दी थी। वर्ष 2011 में यह फार्म पुलिस विभाग के ट्रेनिंग सेंटर के लिए हस्तांतरित कर दिया गया।
मुख्य कृषि अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अब जिले में कृषि विभाग का कोई फार्म नहीं है। बीजों का अनुकूलन, बीज उत्पादन, किसानों को प्रशिक्षण आदि कार्य कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ द्वारा ही संपादित किए जा रहे हैं।



मॉडल नहीं बन पाया पवालियां फार्म
रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि विकासखंड की ग्राम पंचायत डमार के पवालियां स्थित कृषि फार्म करीब 35 वर्ष बाद भी काश्तकारों के लिए मॉडल नहीं बन पाया। पिछले वर्ष आपदा से इस फार्म का बड़ा हिस्सा बाढ़ की भेंट चढ़ गया।
कृषि विभाग ने वर्ष 1979 में पवालियां में 4.85 हेक्टेटर भूमि में फार्म की स्थापना की थी। विभाग ने यह भूमि मालकोटी गांव के थोकदार बर्त्वाल परिवार से खरीदी थी। इस फार्म की यादें प्रकृति के चितेरे कवि के रूप में प्रसिद्ध चंद्रकुंवर बर्त्वाल (1919 से 1947) से जुड़ी हुई हैं। क्षय रोग से पीड़ित होने के बाद चंद्रकुंवर ने अपना एकाकी जीवन यहीं बिताया था। पवालियां कृषि फार्म में चंद्रकुंवर के नाम पर संग्रहालय निर्माण की मांग भी की जा रही है। गत वर्ष जून माह की आपदा में फार्म का 3.2 हेक्टेअर भाग तबाह हो गया। पशुशाला, बीज भंडार और सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई। कृषि विभाग ने इन कार्यों के लिए शासन से 44 लाख रुपये की डिमांड की है।
विवि ने बाद में पीछे खींचे थे हाथ
रुद्रप्रयाग स्थापना काल से इस फार्म की स्थिति नहीं सुधर पाई। करीब पांच वर्ष पहले जीबी पंत कृषि एवं इंजीनियरिंग विवि पंतनगर ने इसे अधिग्रहण कर इसको मॉडल फार्म बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बाद में विवि ने कदम पीछे खींच लिए। वर्तमान में यहां कृषि विभाग ने गेहूं बोए हुए हैं।
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