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कम हुई रुचि तो घटा उत्पादन

Pauri

Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
कोटद्वार। भाबर के झंडीचौड़ स्थित रेशम विभाग में कई सालों से उत्पादन घटता जा रहा है। विभाग के पास जमीन की कमी नहीं है। रेशम विभाग की शिवपुर और झंडीचौड़ में इतनी जमीन है कि उससे ही कई सौ किलो रेशम उत्पादन किया जा सकता है, लेकिन कुछ सालों से रेशम उत्पादन में लोगों का रुझान कम होने से ये व्यवसाय प्रभावित होने लगा है। झंडीचौड़ स्थित रेशम फार्म से काफी साल पहले काफी उत्पादन होता था।
भाबर के झंडीचौड़ में रेशम विभाग की लगभग 35 बीघा जमीन है। इस समय वहां करीब 32 लोग ही रेशम उत्पादन में जुड़े हैं। इस सीजन में वहां पर 474 किलो रेशम का उत्पादन किया गया। हालांकि यह अन्य सभी केंद्रों से काफी अधिक रहा है। जबकि दस साल पहले यहां पर 900 किलो से 1000 किलो तक रेशम का उत्पादन होता था। तब इस सेंटर से 60-65 तक काश्तकार जुडे़ रहते थे, लेकिन लोगों का इस ओर रुझान कम होने से यह कारोबार भी सिमटता जा रहा है।

इंसेट
क्या रहे हैं कारण

कम होता है फायदा
रेशम उत्पादन से लोगों का रुझान कम होने का मुख्य कारण इससे फायदा कम होना है। हालांकि यह लोगों के लिए एक गृह उद्योग रहा है, लेकिन लोग अब इस पर मेहनत करने के बजाय दूसरे कामों में मेहनत करना ज्यादा पसंद करते हैं। कई बार ज्यादा मेहनत करने के बाद भी उत्पादन कम होता है तो लोगों को नुकसान झेलना पड़ता है।

मौसम का भी प्रभाव
रेशम उत्पादन कम होने के लिए मौसम को भी जिम्मेदार माना जाता है। समय पर बारिश नहीं होने से शहतूत की पत्तियां रुखी होती हैं जिससे रेशम कीट बढ़िया रेशम नहीं बना पाता है।

प्लाटिंग भी है कारण
जब विभाग ने रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने से अपना ध्यान हटा दिया तो लोगाें ने भी शहतूत के पेड़ लगाने के बजाय जमीनों पर प्लाटिंग कर दी। जमीन के अच्छे पैसे मिलने पर लोग इस ओर कम ध्यान देने लगें।

घट रहे शहतूत के पेड़
- पहले के मुकाबले क्षेत्र में शहतूत के पेड़ों की संख्या भी कम हुई है। खुद रेशम विभाग में बिड़े शहतूत के पेड़ नहीं हैं। रेशम कीट जब रेशम बनाता है उस समय उसको बहुत अधिक भोजन चाहिए होता है। पत्तियां कम होने से वह रेशम कम बना पाता है, जिससे रेशम की क्वालिटी भी बिगड़ जाती है। इससे उसके दाम में फर्क आ जाता है।

शासन को है लिखा
- झंडीचौड स्थित रेशम विभाग का निरीक्षण किया गया है, जो भी कमियां हैं उनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन को लिखा गया है। - राजीव कुमार, निरीक्षक कोटद्वार रेंज, रेशम विभाग।
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