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सुपरवाइजरों की कमी से नहीं हो पा रहे काम

Pauri

Updated Wed, 19 Dec 2012 05:30 AM IST
कोटद्वार। महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजरों का टोटा बना है। पौड़ी जिले के 15 ब्लाकों में 42 सुपरवाइजरों के पद सृजित हैं, लेकिन इन पदों के सापेक्ष केवल 20 सुपरवाइजर ही काम कर रही हैं। 22 सुपरवाइजरों के पद पर वर्षों से भर्ती नहीं की गई है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आंगनबाड़ी के माध्यम से महिलाओं, बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षण की व्यवस्था होती है। इसके तहत बच्चों और महिलाओं को पोषाहार आदि दिया जाता है। इस कार्य के लिए सरकार यथासाध्य आंगनबाड़ी केंद्रों को धन भी उपलब्ध कराती है। लेकिन स्थिति यह है कि जनपद के 1082 आंगनबाड़ी केंद्रों में क्या हो रहा है, किसी को पता नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र खुल रहे हैं या नहीं, उनमें पोषाहार और भोजन दिया जा रहा है या नहीं, किसी को कोई स्थलीय जानकारी नहीं है। जो रिपोर्ट आंगनबाड़ी केंद्रों से आ गई, उसी को सही मान लिया जाता है।
इंसेट
एक सुपरवाइजर के जिम्मे 50 से अधिक केंद्र
विभाग में एक सुपरवाइजर के जिम्मे क्षेत्र के 50 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जबकि एक सुपरवाइजर के पास 20 से 25 केंद्र होने चाहिए। पहाड़ की दुर्गम परिस्थितियों में एक सुपरवाइजर किस तरह 50 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कर पाएगी। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
यहां नहीं एक भी सुपरवाइजर
- बीरोंखाल, नैनीडांडा, थलीसैंण, खिर्सू, पाबौ और पोखड़ा में कोई भी सुपरवाइजर नहीं हैं। यहां की व्यवस्था अन्य लोग संभाल रहे हैं। वहीं दुगड्डा, कल्जीखाल, रिखड़ीखाल और जयहरीखाल में एक-एक सुपरवाइजर काम कर रहे हैं। जबकि अन्य जगहों में भी स्थिति यही है। वहीं जो सुपरवाइजर काम कर रही हैं उनमें से कुछ से बाबू का काम लिया जा रहा है। विभाग में आठ बाबुओं की कमी बनी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सुपरवाइजरों की कमी के कारण काम कर पाना कठिन हो रहा है। केंद्रों का निरीक्षण तक समय से नहीं हो पा रहा है। सुपरवाइजरों की कमी वर्षों से बनी हुई है। इनकी नियुक्ति के लिए बार-बार मांग की गई लेकिन किसी की भी नियुक्ति नहीं की गई। उपलब्ध संसाधनों से ही काम चलाया जा रहा है। - माया बिष्ट, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग पौड़ी गढ़वाल।
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