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चौरास पुल पर दुर्घटना का क्यों इंतजार

Pauri

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
श्रीनगर। श्रीनगर को चौरास क्षेत्र से जोड़ने के लिए अलकनंदा नदी पर निर्मित झूला पुल पर लगातार बढ़ रहा आवाजाही का दबाव कभी भी खतरे का कारण बन सकता है। पुल के जर्जर स्थिति में होने और इसकी प्लेंटे कई जगह पर उखड़ने की वजह से यहां पल-पल खतरा है। इसके बाजवूद भारी संख्या में दौड़ने वाले दुपहिया वाहनों के कारण कब अप्रिय स्थिति बन जाए, कहा नहीं जा सकता। चौरास मोटर पुल के निर्माण में और देरी होने पर लंबे समय तक झूला पुल दबाव सहन योग्य नहीं माना जा रहा है। पुल पर प्रात: दस बजे और शाम चार से पांच बजे के बीच सर्वाधिक दबाव रहता है। झूला पुल पर प्रतिदिन तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राएं और काफी संख्या में विवि के शिक्षक एवं कर्मचारियों के अलावा स्थानीय लोग आवागमन करते हैं।
इनका कहना है
झूला पुल के रस्से कमजोर हैं। दो वर्ष पूर्व झूले के रस्से टूट भी गए थे। शासन से भी इस संदर्भ में विवि के शिक्षकों ने वार्ता कर विशेषज्ञों की टीम से इसे दिखाने की मांग की थी। पुल से गुजरते समय लोग मानसिक रूप से भी अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं। सरकार और प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है। प्रो. एमएम सेमवाल, गढ़वाल विवि।

चौरास स्थित गढ़वाल विवि के परिसर में आने-जाने के लिए विवि कर्मियों को भारी समस्याओं से होकर गुजरना पड़ता है। जिन लोगों के पास चौपहिया वाहन हैं, उन्हें एक ओर आने-जाने के लिए तीन किमी. के बजाय आठ किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। झूला पुल पर दुपहिया वाहनों से गुजरते समय भी खतरा बना रहता है। कमलेश नैथानी, विवि कर्मी

चौरास क्षेत्र के लोगों में छह साल से निर्मित हो रहे चौरास मोटर पुल के निर्माण से नई उम्मीद जगी थी, लेकिन अंतिम दौर में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान ही पुल के ध्वस्त होने से मायूसी है। पुराने झूला पुल से ही अब लंबे समय तक आवाजाही करनी पड़ेगी। यह भी जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। कब खतरा पैदा हो जाए। कहा नहीं जा सकता। रविंद्र सिलवाल, चौरास साक्रौं निवासी।

चौरास आने-जाने में सबसे ज्यादा दिक्कतें छात्रों को हो रही हैं। पुराना झूला पुल लंबे समय तक दबाव सहन करने की स्थिति में नहीं है। हर समय इस पर आवाजाही के दौरान खतरा बना रहता है। यदि जल्द ही चौरास मोटर पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं होता है तो छात्रों को इसके विरोध में लामबंद होना पड़ेगा। झूला पुल पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जानी जरूरी हैं।-शैलेश मलासी, अध्यक्ष छात्र महासंघ।
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