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हर बारहवें साल लौटते हैं गुरु गोरखनाथ

Pauri

Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
कोटद्वार। नाथ समुदाय के लोगों का सिद्धबली मंदिर से विशेष महत्व माना जाता है। यहां होने वाले जयंती महोत्सव में नाथ समुदाय को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। इतना ही नहींष उनका यहां पर अलग से पांडाल लगा रहता है। नाथ समुदाय में मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ हर 12वें साल उस स्थान पर हैं जहां वे रुके हों या तपस्या की हो या फिर पूजा अर्चना। सिद्धबली भी ऐसा ही एक स्थान है जहां पर गुरु गोरखनाथ ने पूजा अर्चना की थी।
नाथों के नौ रूप
- मान्यता के अनुसार गुरु गोरखनाथ कलयुग में शिव के अवतार थे। 12 साल तक गोबर के अंदर रहने के बाद उनका जन्म हुआ था। इसी लिए उनका नाम गोरखनाथ पड़ा। इसके अलावा उसके आठ और अवतार माने जाते हैं। गोरखनाथ ने अपना गुरु मत्स्येंद्रनाथ को बनाया था।
नाम अवतार
गुरु गोरखनाथ शिव
मत्स्येंद्रनाथ मत्स्य माया
चौरंगी नाथ चंद्र
गज कंथड़नाथ गणेश
अचल अचंभेनाथ शेषनाग
आदिनाथ ज्योति
उदयनाथ पार्वती
सत्यनाथ ब्रह्मा
संतोषनाथ विष्णु

गोरखनाथ ही योग के जन्म दाता
- योग के जरिए उन्होंने सारी इंद्रियों पर काबू पाना सीखा। इससे इंसान अपनी सांसारिक माया मोह, कामवासना आदि पर काबू पा जाता है। इंसान अमरत्व की ओर बढ़ता है।

धूनी होती है सबसे पवित्र
-नाथों की धूनी सबसे पवित्र मानी जाती है। उसको उनके पुजारी के अलावा अन्य कोई हाथ नहीं लगा सकता है। इसका वह मां, बहन और बेटी की तरह सम्मान करते हैं।

दर्शनाथ हैं सबसे ऊपर
- नाथों में सबसे उपर दर्शनाथ माने जाते हैं। सांसारिक माया मोह और काम वासना से दूर रहने वाले इन दर्शनाथों के कान बड़े आकार में छिदे होते हैं और उनमें कुंडल पहने जाते हैं। कुंडल को नंदी का निशान माना जाता है। गले में नाथ जनेऊ भी इनकी पहचान मानी जाती है।

क्या है सिद्धबली से जुड़ाव
-मान्यता के अनुसार गुरु गोरखनाथ बद्रीनाथ में 12 साल तक तपस्या करने के बाद जब यहां आए तो उन्होंने यहां पर अखंड धूनी लगा दी। यहां पर उन्होंने हनुमान जी का आह्वान किया और हनुमान ने प्रकट होकर उनको दर्शन दिए। तब ही इसका नाम सिद्धबली पड़ा। सिद्ध का गोरखनाथ और बली का हनुमान से संबध है।
-गुरुगोरखनाथ के मामने वाले सभी नाथों को यहां पर विशेष आमंत्रित किया जाता है। इसकी लंबी कथाएं हैं जो गोरखनाथ और इस स्थान के जुड़ाव को बताते हैं। गुरु गोरखनाथ कलयुग के शिव के अवतार माने जाते हैं। -रामनाथ बाबा, सिद्धबली में रहने वाले
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