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मेडिकल कालेज से फैकल्टी की बेरुखी कायम

Pauri

Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। एमसीआई निरीक्षण के लिए उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, मगर मेडिकल कालेज से फैकल्टी की बेरुखी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। 21 नवंबर को आयोजित वॉक इन इंटरव्यू के लिए सिर्फ पांच डाक्टर ही पहुंचे। इस स्थिति से मेडिकल कालेज प्रशासन पशोपेश में है।
राजकीय मेडिकल कालेज में एमसीआई की स्थाई मान्यता के लिए निरीक्षण फरवरी माह तक कभी भी हो सकता है। एमसीआई लिखित तौर पर शासन तथा मेडिकल कालेज को अवगत करा चुकी है कि नवंबर 2012 से फरवरी 2013 के बीच कभी भी निरीक्षण किया जा सकता है। राजकीय मेडिकल कालेज में 25 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी कम है। विशेष रूप से एनेस्थीसिया, बाल रोग विभाग, मेडिसिन व रेडियोलॉजी विभाग में भी फैकल्टी की कमी बनी हुई है। 21 नवंबर को आयोजित वॉक इन इंटरव्यू से कालेज प्रशासन को खासी उम्मीद थी, लेकिन वहां पर मात्र पांच डॉक्टर ही इंटरव्यू के लिए आ पाए। इसमें से दो हल्द्वानी मेडिकल कालेज तथा दो अन्य डॉक्टर पूर्व से ही कालेज में तैनात हैं, जो प्रमोशन की चाहत में इंटरव्यू में पहुंचे थे। इंटरव्यू में डॉक्टरों के न पहुंचने से मेडिकल कालेज प्रशासन बेहद चिंतित है। यदि ऐसी दशा में एमसीआई की टीम औचक दौरे पर पहुंचती है, तो स्थाई मान्यता पाना मेडिकल कालेज के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।
गाइनी विभाग में भी बनी हुई है कमी
इसी वर्ष चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टर भवानी पाल का प्रमोशन होने तथा डा.रीना कोठियाल का स्थानांतरण हो चुका है। दो अन्य डॉक्टरों के मैटरनिटी लीव पर चले जाने से बेस अस्पताल के गाइनी विभाग में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। एक डॉक्टर ही ओपीडी में रोगियों का परीक्षण कर पा रही हैं, जिससे रोगियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

कोट
-एमसीआई दौरा कभी भी हो सकता है। इंटर्न हॉस्टल तैयार नहीं है। इस सप्ताह त्योहार व राजकीय अवकाश अधिक होने के कारण वॉक इन इंटरव्यू में भी बहुत कम डॉक्टर पहुंचे हैं, लेकिन अगले इंटरव्यू में अधिक से अधिक डॉक्टर पहुंचेंगे, ऐसा अनुमान है। एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी व बाल रोग के लिए डॉक्टरों का न मिलना चिंता का विषय है।-डा.वीएल जहागिरदार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज
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