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बेबस यात्रियों के धैर्य की कब तक परीक्षा

Pauri

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
यमकेश्वर। प्रखंड में एक भी रोडवेज बस संचालित न होने से लोगों को मजबूरन टैक्सियों और अन्य साधनों का प्रयोग करना पड़ रहा है। कोटद्वार से पोखरखाल तक रोडवेज की बसों का संचालन वर्ष 2002 तक हुआ। उस समय कोटद्वार से अमोला, पोखरखाल के लिए तीन, कोटद्वार से बंचूरी के लिए दो, कोटद्वार से भवासी के लिए दो, कोटद्वार से नाथूखाल के लिए दो बसें चलती थी, लेकिन अब इन बसों का संचालन बंद हो गया है।
वर्ष 2007 में पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी ने कोटद्वार-देहरादून के लिए बस संचालित की। उस समय सात-आठ बसें देहरादून-ऋषिकेश-कांडी-कोटद्वार मार्ग पर चलती थी। बाद में सभी बसें बंद हो गईं। वर्ष 2011 में ही दिल्ली से ऋषिकेश और यमकेश्वर के लिए एक बस सेवा की स्वीकृति मिली थी, जो अभी तक संचालित नहीं हो सकी है। वर्तमान में जीएमओयू की मात्र एक बस संचालित हो रही है। क्षेत्र के लोगों ने देहरादून से यमकेश्वर, कोटद्वार के बीच बस सेवा संचालित करने की मांग की है।

इंसेट
- प्रदेश के सभी सड़कों पर रोडवेज की बसों का संचालन होता है, लेकिन हमारे क्षेत्र में कोई बस नहीं चल रही है। अब सरकार को यहां के लिए भी बस का संचालन करना चाहिए। - महावीर सिंह प्रधान ग्राम ठांगर।
- बसों का संचालन नहीं होने से जीप और टैक्सियां अधिक किराया लेती हैं। मार्ग पर दो से तीन बसों का संचालन होना चाहिए।
-राजकुमार, निवासी खेड़ा
- बसों का संचालन होना चाहिए, जिससे जीप टैक्सियों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा। साथ ही लोगों को सुविधा मिलेगी।
-सुरेंद्र सिंह नेगी, ठांगर।
- प्रखंड में नियमित बस सेवा की मांग काफी समय से की जाती रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। - विजेंद्र खत्री, भृगुखाल
क्या कहते हैं अधिकारी
- बसों के संचालन के लिए क्षेत्र के लोग कोटद्वार परिवहन डिपो कार्यालय में अपनी डिमांड भेज सकते हैं। इसके बाद वे रिपोर्ट को निगम मुख्यालय में भेजेंगे। वहां से आदेश आने पर मार्ग का सर्वे होगा और फिर बसों के संचालन की प्रक्रिया मुख्यालय के निर्देशानुसार प्रारंभ की जाएगी। - वीके सैनी, सहायक महाप्रबंधक, कोटद्वार परिवहन डिपो।


सुविधा के नाम पर लुटते हैं यात्री
अनुबंधित ढाबों में नहीं पड़ते छापे
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। उत्तराखंड परिवहन निगम की ओर से यात्रियाें की सुविधा के नाम पर चलाए जा रहे ढाबे लोगों की जेब काट रहे हैं। मगर परिवहन निगम इन ढाबों के साथ अनुबंध करके कभी निरीक्षण तक नहीं करता है। अनुबंध की ज्यादातर शर्त का कहीं भी पालन नहीं किया जाता है।
द्वारीखाल के ग्राम देवीखेत के विलास कुकरेती ने उत्तराखंड परिवहन निगम मुख्यालय देहरादून से सूचना के अधिकार के तहत ढाबा मालिकों से अनुबंध के संबध में 25 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी, जिसमें कई बातें सामने निकल कर आई हैं। जितनी शर्तें अनुबंध में होती हैं उनमें किसी का भी पालन नहीं होता है। अनुबंधित ढाबों पर वास्तविक मूल्य से अधिक दामों पर सामान बेचे जाने को लेकर निगम की ओर से कोई गोलमोल जवाब दे दिया गया। अनुबंधित ढाबों पर बासी खाना खिलाने, दाम से अधिक बेचने, यात्रियों के साथ गलत व्यवहार करने आदि को लेकर विभाग की ओर से औचक निरीक्षण को लेकर भी जवाब नहीं दिया गया। ढाबों के साथ अनुबंध को यात्री सुविधा नाम दिया जाता है, लेकिन विभाग ने कभी यात्रियों की राय या सुझाव लिया है। इस सवाल का जवाब भी उन्होंने यह कहते हुए नकार दिया कि इसका जवाब सूचना के अधिकार के तहत देने का प्रावधान नहीं है। कोई यात्री यहां पर रुकना पसंद करता है या फिर परिवहन निगम अपनी मर्जी से यात्रियों को कहीं पर भी रुकवा देता है, इसमें भी निगम ने इसको सूचना अधिकार के तहत जवाब नहीं दिए जाने की बात कही गई है।






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इसमें फोटो भी है।


गुड्स ट्रेन संचालन की मांग
रेल माध्यम से आने वाले सामान से बढ़ सकता है रोजगार
वर्ष 2000 के पहले चलती थी गुड्स ट्रेन
कोटद्वार। क्षेत्र को रेलवे का व्यावसायिक लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि कोटद्वार के साथ ही पहाड़ के क्षेत्रों के लिए यहीं से व्यावसायिक प्रयोग हो सकता है। कोटद्वार से ही भाबर, दुगड्डा, यमकेश्वर, सतपुली, बैजरो, धुमाकोट, लैंसडौन और बीरोखाल आदि का व्यापार होता है। ऐेसे में रेल माध्यम से आने वाले सामान से क्षेत्र में रोजगार बढ़ सकता है।
गत वर्ष 2000 के पहले तक तो गुड्स ट्रेनों के आने का कार्य हुआ था, लेकिन उसके बाद से यह कार्य पूरी तरह बंद हो गया। इससे रेलवे को लाभ नहीं हो रहा था, जिससे अब रेलवे से न तो टिंबर का कार्य हो रहा है और न ही अनाज ढुलाई व न अन्य कार्य ही हो पा रहे हैं। जबकि रेलवे की ओर से सीमेंट, कोयला और अन्य सामानों की सप्लाई का भी कार्य किया जा सकता है, लेकिन इसमें न तो लोगों की ओर से कोई प्रयास किए गए और न ही रेलवे ने ही इसकी जरूरत समझी।
व्यापारी जितेंद्र भाटिया का कहना है कि रेलवे की ओर से व्यावसायिक कार्य शुरू करने से क्षेत्र का विकास अवश्य ही होगा, जब यहां के लिए रेल लाइन है तो यात्रियों के साथ ही गुड्स की ढुलाई का कार्य भी होना चाहिए। अनिल कुमार पंत का कहना है कि रेल लाइन का अगर यात्रियों के अतिरिक्त व्यावसायिक सामान ढुलाई के लिए प्रयोग किया जाए, तो क्षेत्र का काफी डेवलपमेंट हो सकता है।
-कोटद्वार में रेलवे से गुड्स ट्रेन का संचालन तभी हो सकता है, जब पहले नजीबाबाद रेलवे स्टेशन में गुड्स ट्रेन का रैक खड़ा करने की अतिरिक्त व्यवस्था हो। पहले कोटद्वार तक सीमित वैगन आते थे, लेकिन अब 40 वैगन से कम की आपूर्ति संभव नहीं हो पाती है। वैसे लोगों की मांग पर रेलवे इस बारे में विचार कर सकता है।
-एमएस नेगी, स्टेशन अधीक्षक कोटद्वार
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