आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

घर वापसी यानी कट्टरपंथ पर करारी चोट

Pauri

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। शाहजहांपुर की विमर्श नाट्य संस्था की प्रस्तुति घर वापसी नाटक ने धर्म की कट्टरता, जातिवाद, छुआछूत व भेदभाव पर करारी चोट की। नाटक के हर किरदार ने अपना श्रेष्ठ देने की कोशिश करते हुए नाटक को प्रभावी बना दिया। दर्शक इस प्रभाव से आनंदित नजर आए। नाटक का संगीत पक्ष सबसे मजबूत रहा, जिसने दर्शकों को खूब रिझाया। जाने-अनजाने नया थियेटर की दो प्रस्तुतियों के साथ भी दर्शकों ने इस नाटक की तुलना की।
नाटक के मुख्य नायक त्रिभुवन तिवारी की भूमिका में स्वयं निर्देशक मनीष मुनि ने शानदार अभिनय किया, तो नायिका हुस्ना का किरदार निभा रही अंजलि सोनी ने भी दर्शकों का दिल जीता। काजी बने शमशुद्दीन समीर और संपूर्णानंद बने शिवा शर्मा ने भी कुशल अभिनय का प्रदर्शन किया। नाटक में दिखाए गए विभिन्न दृश्यों जैसे होली, धर्मसभा की बैठकों, ग्रामीणों की आपसी वार्ता आदि में संगीत पक्ष ने रंग भर दिए। डेढ़ घंटे तक दर्शकों को बांधे रखने में संगीत पक्ष का खास योगदान रहा। संपूर्ण नाटक में प्रकाश संयोजन पर मेहनत साफ दिखाई दी। कट्टरवाद पर चोट करते हुए नाटक ने राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी मजबूती से आगे बढ़ाया।

नाटक के प्रमुख संवाद
- मेरा प्यार उतना ही सत्य और पवित्र है, जितना कोई धर्म या मजह़ब।
- लोग कहते हैं कि पत्नी का वही धर्म हो जाता है, जो उसके पति का होता है।
- अगर अछूत मैला नहीं ढोएगा सिर पर, तो कौन ढोएगा? ये ऋषियों की संतानें तो नहीं ढोएंगी?
- तुम क्या चाहते हो, स्वयं ईश्वर द्वारा निर्मित चातुर्वण्य सिद्धांत भंग कर दें?
- कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस या किसी अन्य जानवर को छू लेने से व्यक्ति अस्पृश्य नहीं होता, किंतु अपने ही जैसे हाड़-मांस से बने व्यक्ति का स्पर्श करते ही उसका भगवान भ्रष्ट हो जाता है।


बच्चों को नाटक में मिली नो एंट्री
श्रीनगर। जश्न-ए-विरासत राष्ट्रीय नाट्य समारोह देखने पहुंचे तमाम बच्चों को बुधवार को निराश होना पड़ा। आयोजकों का कहना है कि परिजनों के बगैर ऑडिटोरियम पहुंचे बच्चों को भीतर इसलिए नहीं आने दिया गया, ताकि उनके अभिभावक उनके लिए परेशान न हों। आयोजन स्थल पर नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में बच्चे भी स्वामी मन्मथन ऑडिटोरियम के बाहर डटे रहे। नाट्य समारोह के तीसरे दिन भीड़ को संभालना आयोजकों के लिए सिरदर्द बन गया। ऐसे में उन्होंने अभिभावकों के बगैर वहां पहुंचे पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए भी नो एंट्री कर दी। दूसरी तरफ, मुख्य अतिथि कांग्रेसी नेता सूर्यकांत धस्माना और कपकोट विधायक ललित मोहन फर्स्वाण के देरी से पहुंचने से दर्शकों का इंतजार लंबा खिंचा। नाटक लगभग पौने दो घंटे देरी से शुरू हुआ, जिससे न सिर्फ दर्शकों को इंतजार करना पड़ा, नाटक मंचन के लिए तैयार टीम भी परेशान रही।




मंच पर आज
जश्न-ए-विरासत 2012 में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रही यूनिवर्सिटी यूथ क्लब की टीम आज मंच पर ‘हम हैं ना की’ प्रस्तुति देगी। यूथ क्लब के सचिव दीपक बिष्ट व कला निष्पादन केंद्र के विद्यार्थी रहे महेंद्र पंवार तथा नवीन जोशी द्वारा लिखित इस नाटक में बच्चों की जिज्ञासा तथा उनकी तर्कशक्ति को केंद्रीय भूमिका में रखा गया है। गत तीन वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन रंगमंच कार्यशाला का सफल आयोजन करा रहे यूनिवर्सिटी यूथ क्लब ने वर्ष 2012 की कार्यशाला के लिए यह नाटक तैयार किया था। नगर क्षेत्र में ही दूसरी बार नाटक का मंचन होगा, जिसमें 34 कलाकार शामिल होंगे। गांव की रामलीला को राजनीति के लिए भेंट चढ़ा रहे कुछ षडयंत्रकारियों के षडयंत्र को बच्चों के बौद्धिक चातुर्य से फेल करती यह कहानी बाल वर्ग के लिए विशेष दर्शनीय होगी। नाटक में अक्षांश उनियाल, शोभित भट्ट, कौस्तुभ, अभिषेक, नेहा, सौम्य, अनुराग, आयुष, रवींद्र, गौरव, मनीष चमोली मुख्य भूमिका में हैं।



नाटक का कथानक
घर वापसी धर्मांतरण से उपजे कई सवालों पर दृष्टिपात कराता नाटक है। इंजीनियर राजेश कुमार द्वारा लिखित इस नाटक में त्रिभुवन तिवारी नामक युवक हुस्ना नाम की मुस्लिम कन्या से शादी के लिए अड़ा रहता है। समाज तथा बिरादरी से अलग होकर वह हुस्ना के समुदाय को खुश करने के लिए धर्मांतरण करता है। दो बच्चों के परिवार के साथ खड़े त्रिभुवन उर्फ तबरेज को अचानक अपने मूल में बैठी संस्कृति, सभ्यता व संस्कारों का भान स्वामी अपूर्वानंद कराते हैं और एक बार फिर वह धर्मांतरण के लिए तैयार होता है। वह नहीं समझ पाता कि उसकी औलाद अब किस धर्म से होगी। इसका निर्णय वह पत्नी और बच्चों छोड़ देता है। तबरेज से फिर त्रिभुवन बन जाने पर उसे हिंदू धर्म में तो शामिल मान लिया जाता है, लेकिन कान्यकुब्ज ब्राह्मण होने का प्रतिनिधित्व उसे नहीं मिल पाता और वह अपने मूल धर्म में लौटने के बावजूद सिर्फ अछूत ही रह पाता है। इसलिए उसे अपने समुदाय में अपनी बेटी के लिए वर तक नहीं मिल पाता। अंतत: वर्ण व्यवस्था की दंभी परंपराओं व रूढ़ियों से खुद को अलग कर देता है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

फिल्म 'जब हैरी मेट सेजल' का 'हवाएं' गाना रिलीज, 15 मिनट में ही 25 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा

  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

'कार्बन' का पोस्टर रिलीज, जल्द आएगा ट्रेलर

  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

आतिफ असलम का ये सॉन्ग अब तक 20 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा

  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

आप भी खाते हैं डेस्क पर खाना तो हो जाएं सावधान..फंस सकते हैं इस मुसीबत में

  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

एक हिट देकर गुमनामी में खो गई थी 'तुम बिन' की ये हीरोइन, अब संभाल रही अरबों का बिजनेस

  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

Most Read

ये है बिहार का राजनीतिक गणित, जानिए किसके साथ बन सकती है सरकार

What will be bihar's new political equations after nitish kumar's resignation
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

बिहार सीएम पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार के बयान की 20 बड़ी बातें

Bihar Chief Minister Nitish Kumar's statement after resignations
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

कभी 30 रुपये देकर इसी किराये के मकान में रहते थे कोविंद, अब यहां जश्न

some important facts about ramnath kovind
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

समायोजन रद्द होने पर यूपी के शिक्षामित्रों में उबाल, कई जगह प्रदर्शन

Shiksha Mitra Upon cancellation of the adjustment of UP education, stir in many places
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017
  • +

J&K: आर्मी के जवानों ने थाने में घुसकर पुलिस को पीटा, अब्दुल्ला बोले- कार्रवाई हो

soldier beat policemen in jammu six injured
  • रविवार, 23 जुलाई 2017
  • +

यूपी: पेपर लीक गैंग ने लगाई दरोगा भर्ती में सेंध, पूरी परीक्षा रद्द

up police recruitment entire process cancel
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!