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इंसानियत सिखा गया ‘जिन लाहौर नहि वेख्यां’

Pauri

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। राष्ट्रीय नाट्य समारोह में नया थियेटर की दूसरी प्रस्तुति ‘जिन लाहौर नहि वेख्यां’ इंसानियत का पाठ पढ़ा गया। एक-एक किरदार के सशक्त अभिनय की डोर में दर्शक अंत तक बंधा रहा। गीत, गज़ल, शेरो-शायरी और कलाकारों का उम्दा अभिनय ने दर्शकों को हंसाया भी, तो भावुक भी किया। आसान पंजाबी भाषा में बोले गए संवाद गैर पंजाबी भाषी दर्शकों के लिए सुस्पष्ट थे। विभाजन में अंबाला से कराची पहुंचे शायर नासिर की शेरो-शायरी नाटक में सबसे जानदार पहलू था। नाटक को इसने पूरे समय जीवंत बनाए रखा।
सिकंदर मिर्जा व पहलवान याकूब खान का किरदार निभा रहे कलाकारों ने भी दमदार अभिनय से खूब तालियां बटोरी। नाटक में प्रत्येक सीन के बाद गाई गई गज़लें नाटक को दिशा देने तथा आगे बढ़ाने में बखूबी कामयाब रही। नासिर काजमी की गजलें ये जमीं बंट गई, आसमां बंट गया और नतीजे में ये हिन्दुस्तान बंट गया तथा ये सितम और कि हम फूल कहें खारों को, इससे तो आग ही लग जाए शमनजारों को जैसी गज़लों ने नाटक के किरदारों को तथा कथानक को जानने व समझने में दर्शकों की खूब मदद की। नाटक में लाहौर की पृष्ठभूमि के कारण गायन तथा संवाद संप्रेषण में उर्दू का अधिक पुट था। पाकिस्तान में रह रहे लोग कट्टरपंथियों के दबाव के बावजूद दीपावली की खुशी तथा एक हिंदू महिला की मृत्यु पर मौलवी का हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उसकी अंत्येष्टि के लिए पैरोकारी करना दर्शाता है कि दुनियां के सभी धर्मों का लक्ष्य सिर्फ मानवता है।
नाटक की थीम

जिन लाहौर नई वेख्या की कहानी भारत पाक विभाजन के बाद उपजे दर्द को पेश करती सच्ची दासतां है। दिल्ली से प्रकाशित रोजना प्रताप में प्रमुखता से प्रकाशित इस कहानी को अजहर वसागत ने लिखा। उनकी कहानी को स्व.हबीब तनवीर ने निर्देशित कर देश व विदेशों में सैकड़ों मंचों पर प्रस्तुत किया है। कहानी में विभाजन के समय पाकिस्तान में रह रहे जौहरी का परिवार दंगों की भेंट चढ़ जाता है, जिसमें सिर्फ उसकी मां जीवित रह जाती है। बचते-बचते 22 कमरों के मकान में अकेली बची इस बुढ़िया का किसी को अता-पता तक नहीं होता, जबकि भारत से आए मिर्जा को वही भवन एलॉट होता है, जिसमें कभी जौहरी का परिवार रहता था। सिकंदर मिर्जा अपनी बेगम अमीदा, बेटी तन्नो व बेटे जावेद के साथ जब इस घर में रहने आते हैं, तो उन्हें मालूम होता है कि वहां कोई हिंदू महिला पहले से ही रह रही है। धीरे-धीरे मिर्जा के परिवार की जौहरी की मां से अच्छी दोस्ती हो जाती है और वह जगमाई के नाम से पुकारी जाने लगी। एक दिन दिल का दौरा पड़ने से जगमाई की मृत्यु हो जाती है, जिसके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद शुरू होता है। हिंदू महिला की वहीं के रीति-रिवाजों के अनुसार अंत्येष्टि के लिए मौलवी द्वारा पैरवी किए जाने पर वहां लोग उसे जान से मार देते हैं।

नाटक के खास डायलाग
- तुम जमीन वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा।
- विभाजन के बाद अब पाकिस्तान बन गया है, हिन्दुस्तान नहीं भारत कहिए भारत।
- कोई भी मज़हब दूसरों को बुग्ज और अदखत़ नहीं सिखाता।
- जब हम और माई एक साथ एक ही घर में रह सकते हैं, तो हिन्दुस्तान में हिंदू-मुस्लिम क्यों नहीं रह सकते?
- तो फिर पाकिस्तान क्यों बना?
- तुम दूसरों के मजहब को बुरा न कहो, ताकि वह तुम्हारे मजहब को बुरा न कहे।
- हाकिमों से मुझे बड़ा डर लगता है।

मंच पर आज
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की नाट्य संस्था विमर्श की ओर से नाटक ‘घर वापसी’ का मंचन शाम साढ़े चार बजे से होगा। पांच वर्षों से लगातार व्यावसायिक स्तर पर रंगकर्म कर रही यह संस्था इस नाटक का लखनऊ, बरेली, शाहजहांपुर, भागलपुर, पौड़ी, छत्तीसगढ़ सहित कई स्थानों पर 19 बार मंचन कर चुकी है। चर्चित निर्देशक मनीष मुनि द्वारा निर्देशित तथा इंजीनियर राजेश कुमार द्वारा लिखित घर वापसी नाटक धर्मांतरण के लिए कट्टरपंथ पर प्रहार करता है। नाटक में स्वयं निर्देशक मनीष मुनि, अंजलि सोनी, अनिल कुमार, शिवा शर्मा, शमशुद्दीन समीर मुख्य भूमिका में रहेंगे।

जश्न-ए-विरासत में प्रस्तुति देने पहुंचे थे पीपली लाइव के छह कलाकार
श्रीनगर। राष्ट्रीय नाट्य समारोह यानी जश्न-ए-विरासत में पहले और दूसरे दिन की प्रस्तुति में कई कलाकार शामिल हुए। मगर छह कलाकार ऐसे भी थे, जो खासी चर्चा बटोरने वाली आमिर खान की फिल्म ‘पीपली लाइव’ में अभिनय कर चुके हैं। पीपली लाइव के इन किरदारों को नारद मोह की नगरी श्रीनगर खूब भायी। श्रीनगर की खूबसूरती के कायल दिखे। रंगमंच पर बात की, पीपली लाइव के अनुभव भी साझा किए।
पीपली लाइव में ढाबे वाले बजरंगी की आपको याद है न। ये भूमिका निभाई थी उदयराम श्रीवास ने। उन्होंने बताया कि वे 1975 से थियेटर से जुडे़ हैं। कनाडियाई फिल्म दि वर्दिंग सीजन में भी काम किया है। स्व.हबीब तनवीर निर्देशित आगरा बाजार, सोन सागर, मृच्छकटिकम्, राज रक्त सहित हबीब तनवीर निर्देशित सैंकड़ों नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। वे बताते हैं कि छत्तीसगढ़ी विधा नाचा से उन्होंने अपने नाट्य सफर की शुरूआत की। श्याम बेनेगल की फिल्म चोर-चोर की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात हबीब तनवीर से हुई और वे नया थियेटर से जुड़ गए।
यहां प्रस्तुति देने के लिए आए पीपली लाइव के दूसरे किरदार मनहरण गंधर्व श्रीनगर के प्राकृतिक सौंदर्य से आह्लादित हैं। अलकनंदा के दूसरी ओर बने ऑडिटोरियम की भी वे खास तारीफ करते हैं। हालिया रिलीज फिल्म चक्रव्यूह में भी वे मोती पान वाला के किरदार में हैं। पीपली लाइव में नत्था के मित्र की भूमिका में दिखाई दिए मनहरण के चार शॉट फिल्म में थे। पीपली लाइव में नत्था की बेटी बनी पारूल ने सोमवार को जश्न-ए-विरासत में कुंती के अभिनय के साथ ही सुंदर नृत्य भी प्रस्तुत किया। आठवीं कक्षा की छात्रा पारूल कहती है कि मात्र ढाई वर्ष की आयु में ही उसका नाता थियेटर से तब जुड़ गया था, जब आगरा बाजार में मैंने पहला डायलॉग चाचा, मां ने आम का अचार मंगाया है, बोला था। पारूल के पिता रामचंद्रा सिंह के निर्देशन में ही नया थियेटर की प्रस्तुतियां होती हैं।

पीपली लाइव में ये थे कलाकार:
उदयराम श्रीवास- बजरंगी
मनहरन गंधर्व - नत्था के मित्र
राहुल जादव - प्रेस रिपोर्टर
योगेश तिवारी - प्रेस रिपोर्टर
पारूल - नत्था की बेटी
धन्नूलाल सिन्हा - हॉस्पिटल का रोगी
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