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देवलगढ़ : 12 साल में भी नहीं आया मानचित्र पर

Pauri

Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। राज्य निर्माण के 12 साल बाद भी ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल देवलगढ़ को पर्यटन मानचित्र में स्थान नहीं मिल पाया है। पर्यटन विभाग ने कई बार इस क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने के दावे तो किए, लेकिन सभी आश्वासन हवाई साबित हुए हैं।
गढ़वाल की राजधानी रहा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देवलगढ़ क्षेत्र को राज्य निर्माण से पहले ही पर्यटन विभाग पर्यटन मानचित्र में लाने की बात कहता रहा है। राज्य निर्माण के बाद वर्ष 2005 में पौड़ी-खिर्सू-लैंसडाउन को पर्यटन मानचित्र में शामिल किया गया और यहां पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ी, लेकिन देवलगढ़ आज तक पर्यटन मानचित्र पर नहीं लाया गया।
पांच साल पहले संसदीय चुनावों के समय गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने एक जन सभा में देवलगढ़ को पर्यटन मानचित्र में शामिल कर लेने की घोषणा तक कर डाली, लेकिन ये घोषणा भी हवाई निकली। वहीं संस्कृति विभाग की अनदेखी के कारण यहां स्थित ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल सोम का मांडा एक ओर से टूट गया है। गौरा देवी मंदिर समूह में एक मंदिर टेढ़ा हो गया है, तो कालनाथ-सत्यनाथ मंदिर टूटकर धराशायी हो गया है।
इंसेट
कोट
- पर्यटन मानचित्र में देवलगढ़ को लाने के लिए पर्यटन विभाग प्रयासरत है। अगले पर्यटन सर्किल में देवलगढ़ को अवश्य शामिल किया जाएगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। - पीके गौतम, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी।
- मैंने कई बार जन प्रतिनिधियों एवं पर्यटन विभाग से देवलगढ़ के विकास को लेकर वार्ता की और पत्र व्यवहार किया है। श्रीनगर से देवलगढ़ के लिए रोप-वे की मांग भी क्षेत्रीय जनता ने की थी। लेकिन आज तक इसे पर्यटन मानचित्र से दूर रखने से क्षेत्र के लोग मायूस हैं। - केपी उनियाल, राज्य आंदोलनकारी और शाक्त उपासक देवलगढ़।

ये हैं देवलगढ़ के महत्वपूर्ण स्थल
- नाथ संप्रदाय से जुड़ी महत्वपूर्ण लोगों की समाधियां।
- गढ़वाल राजा अजयपाल ने देवलगढ़ को बनाई थी राजधानी।
- माता राजराजेश्वरी का सबसे चर्चित मंदिर, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- गौरा देवी मंदिर समूह, जिसमें आधा दर्जन से अधिक मंदिर शामिल हैं, जो संस्कृति विभाग के अधीन हैं।
- सोम का मांडा, गढ़वाल राजाओं के समय इसी स्थल पर न्याय करते थे राजा।
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