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साझी संस्कृति को बचाने का संकल्प

Pauri

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
लैंसडौन। नगर में अध्ययन कर चुके पुराने छात्रों के तीन दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन लैंसडौन की साझी संस्कृति को बनाए रखने का संकल्प लिया गया। पूर्व छात्रों में कई वयोवृद्ध भी थे। उन्होंने नगर की सामाजिक, शैक्षणिक, खेलकूद आदि विषयों पर विचार विमर्श किया।
पूर्व छात्रों का संगठन ओल्ड स्टूडेंटस एसोसिएशन (लोसा) से जुड़े पूर्व छात्रों का तीन दिनों तक नगर में जमावड़ा लगा रहा। उन्होंने सम्मेलन के अंतिम दिन कई विषयों पर गहनता से विचार विमर्श किया। समारोह के मुख्य अतिथि शिक्षाविद सतीश नैथानी ने कहा कि इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिशों ने यहां पर विभिन्न समुदाय के लोगों को बसाकर साझी संस्कृति को बढ़ावा दिया था। वह आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि बढ़ते पर्यटन से इस संस्कृति को खतरा हो सकता है। साहित्यकार शिक्षाविद डा रणवीर चौहान, शिक्षाविद सुरेश वर्मा, महाप्रबंधक वित्त निगम दिल्ली सतीश कालेश्वरी, डा सत्य प्रसाद नैथानी सहित अन्य सभी पूर्व छात्रों ने इस संस्कृति को बढ़ाने के लिए संकल्प लिया। लोसा से जुड़े कई लोगों को अंत में सम्मानित किया गया। इसमें वयोवृद्ध चौथमल खंडेलवाल, सतीश नैथानी, योगेश पांथरी, डा एसपी नैथानी, सुरेश वर्मा, सतीश कालेश्वरी, एसएन घनसाला, रैमानी, मोहन बिष्ट, भूप सिंह, रमेश शर्मा, राजेंद्र नेगी, वी माया कोटि सहित 15 लोग शामिल थे। मरणोपरांत भी कई लोगों सम्मानित किया गया। इसमें स्व. राजेंद्र नेगी, ठाकुर लाल शाह, सुभाष गैरोला, ताराचंद खंडेलवाल, महावीर प्रसाद खंडेलवाल, राजन लाल, हबीबुर्र रहमान और राम प्रसाद ध्यानी शामिल थे। इनके परिजनों ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर देवेंद्र नैथानी के काव्य पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।


लोसा का इतिहास
लोसा का गठन सबसे पहले 1953 में सर्वोदय नेता मानसिंह ने जीआईसी जयहरीखाल में किया था। दो साल बाद यह संगठन बंद हो गया। उसके बाद 1959 में लोसा का पुनर्गठन किया गया। कुछ वर्ष बाद यह फिर निष्क्रिय हो गया। 1974 में इसको शिक्षाविद सतीश नैथानी ने फिर सक्रिय किया, लेकिन कुछ समय बाद सब इधर-उधर चले गए और संगठन की फिर निष्क्रिय स्थिति बन गई। 18 नवंबर 2011 को इस संगठन को फिर बनाया गया। इस बार सोशल नेटवर्क फेसबुक के जरिए सभी को इसमें जोड़ा गया। इस समय इस संगठन के 410 सदस्य बन चुके हैं।
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