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छात्र संख्या घटी, तो नौकरी खटाई में

Pauri

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
पौड़ी। सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या घटने पर भोजन माताओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। स्कूल की सबसे छोटी कक्षा में बच्चे का प्रवेश ही भोजन माताओं की नौकरी को बचा पाएगा। शिक्षा सचिव की ओर से जारी निर्देशों में इसका हवाला दिया गया है।
मध्याह्न भोजन योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन ने नए फरमान जारी किए हैं। सचिव शिक्षा की ओर से राज्य परियोजना सर्व शिक्षा अभियान को मिले निर्देशों में भोजन माताओं के चयन, सेवा से बाहर करने और नए दायित्वों के बारे में निर्देश हैं। पूर्व की तरह भोजन माता का चयन का अधिकारी विद्यालय प्रबंधन समिति या पीटीए के पास ही सुरक्षित है।
मानकों के अनुरूप एक से 25 छात्र संख्या वाले स्कूल में एक, 26 से 100 तक संख्या वाले स्कूलों में दो भोजन माताएं तैनात होंगी। हालांकि दूसरी भोजन माता के लिए 50 छात्र संख्या होनी आवश्यक है। नए शिक्षा सत्र में कई विद्यालयों छात्र संख्या घट गई है। ऐसे में जहां दो, तीन, चार या पांच भोजन माताएं तैनात हैं वहां नौकरी खटाई में पड़ना तय है। इन हालातों में उसी महिला की नौकरी बच पाएगी जिसका बच्चा स्कूल की सबसे छोटी कक्षा में दाखिल होगा। यदि दोनों भोजन माताओं के बच्चे एक ही कक्षा में हैं, तब सबसे कम उम्र वाले बच्चे की माता को अवसर मिलेगा। नए निर्देशाें ने कई भोजन माताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं।



अन्याय है शासन का फरमान
पौड़ी। शासन के नए निर्देशों पर भोजन माता कामगार यूनियन ने बाहें चढ़ा ली हैं। जिलाध्यक्ष रोशनी बिष्ट, मंत्री कबोत्री देवी, सरोजनी रावत, लक्ष्मी देवी आदि ने कहा कि हाल में जारी हुए फरमान में शासन ने कामगारों की छंटनी का मूड बनाया है। यूनियन को संगठित होकर तुगलकी फरमानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। कामगार के हाथों से काम छीनने की साजिश रची जा रही है।


छात्र संख्या पर इस तरह होगी तैनाती
छात्र संख्या भोजन माता से कम नहीं
1-25 1
26-100 2 50
101-200 3 150
201-300 4 250
300 से अधिक 5 350


‘‘राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान की ओर से मध्याह्न भोजन योजना के संदर्भ में नए निर्देश फिलहाल कार्यालय में प्राप्त नहीं हुए हैं। छात्र संख्या कम होने पर प्रक्रिया स्वाभाविक है। निर्देश मिलते ही अनुपालन किया जाएगा।’’
-यशवंत चौधरी, जिला परियोजना अधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान पौड़ी।
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