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बारिश हो, तो यहां शिफ्ट में चलती है क्लास

Pauri

Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
लैंसडौन। राजकीय इंटर कालेज धोबीघाट के दो कमरे बरसात में तालाब में तब्दील हो जा रहे हैं। यही पर बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं। यहां पर कक्षा नौ से 12 वीं तक की कक्षाएं चलती हैं। चार में से दो कक्षाओं को चलाने के लिए अन्य दो की छुट्टी करनी पड़ती है। थोड़ी सी बारिश हो जाए तो पूरे विद्यालय की ही छुट्टी करनी पड़ती है। विद्यालय की स्थिति इतनी खतरनाक है कि वहां के प्रधानाचार्य भी डर के मारे अपने कक्ष में नहीं बैठते।
लैंसडौन क्षेत्र में जीआईसी धोबीघाट का भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। विद्यालय के चार कमरे बारिश होते ही तालाब में तब्दील हो जा रहे हैं। कमरों से पानी की निकासी के लिए अंदर से नाली बनाई गई है। इसके बाद दो कमरे ऐसे हैं जहां पर सीलन के चलते बदबू आती रहती है। यहां पर विद्यालय की चार कक्षाएं संचालित होती हैं। यहां पर भी ऐसी स्थिति है कि एक बार में दो कक्षाएं चलती हैं। पहले दो कक्षाएं चलने पर दो कक्षाओं के छात्र-छात्राएं इंतजार करते हैं। उसके बाद जब उनका नंबर आता है तो पहले वालों की छुट्टी कर दी जाती है।
इस तरह से दो कमरों में शिफ्ट में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बारिश होने पर इन दो कमरों में भी पानी की गंगा बहने लगती है तो फिर विद्यालय की छुट्टी करनी पड़ती है। यानी धूप खिलने पर ही विद्यालय लगता है। विद्यालय में कुल आठ कमरे हैं। इसमें चार कमरों में पानी भर जाता है। इससे कमरे तालाबों में बदल जाते हैं। दो ऐसे कमरे हैं जहां पर पानी भरा रहता है। शेष दो कमरों में ही चार कक्षाएं चलती हैं।

150 छात्र पढ़ते हैं
-विद्यालय में कक्षा नौ से लेकर बारहवीं तक के 150 छात्र पढ़ते हैं। आस-पास के करीब 20 गांवों से छात्र यहां पढ़ने आते हैं। कई तो 10 किमी तक की दूरी तय करके विद्यालय आते हैं, लेकिन विद्यालय की स्थिति ऐसी है कि यहां पर कक्षाएं चले या न चले यह मौसम पर निर्भर करता है।


अधूरा निर्माण है जिम्मेदार
-शिक्षा विभाग ने विद्यालय में चार कमरों के निर्माण के लिए वर्ष 2008 में 13 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की थी। इसके लिए कार्यदायी संस्था आरईएस को बनाया गया था। चार साल पहले कमरों का निर्माण कार्य शुरू भी कर दिया गया था। दो वर्ष पहले जितना काम हुआ था उससे रत्ती भर भी काम आगे नहीं बढ़ पाया। इनमें दो कमरों में खिड़कियां, दरवाजे और फर्श का काम अधूरा है। दो कमरों में चाहरदीवारी करके छत नहीं डाली गई।


-पहले के दो कमरों का काम जिस ठेकेदार को दिया गया था उसने धीमी गति से काम किया है। अन्य दो कमरों के ठेकेदार पर धीमी गति के लिए पेनाल्टी लगाई गई है। कार्य की फिर निविदा करवाई गई है। एक दो सप्ताह में काम शुरू करा दिया जाएगा।
-वाईएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता आरईएस

-मैंने भवन का निरीक्षण किया है। वास्तव में विद्यालय में पढ़ने लायक व्यवस्थाएं नहीं है। कमरों का निर्माण अधूरा है। इसके लिए आरईएस को नोटिस भेजा गया है।
पीएल शाह, एसडीएम लैंसडौन
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