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चार हफ्ते में फैसला न हुआ तो शुरू कर सकते हैं कार्य

Pauri

Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य पर 31 जून 2011 से धारा पांच के तहत काम पर लगाई गई रोक पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शीघ्रातिशीघ्र निर्णय लेने के आदेश दिए हैं। पर्यावरण सुरक्षा कानून की इस अपीलीय अथॉरिटी ने कहा है कि चार सप्ताह में निर्णय न लिया गया तो कंपनी कार्य शुरू कर सकती है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष जीवीके ने जुलाई 2011 में अपील दायर की और निर्माण कार्य पर लगी रोक को अनावश्यक बताते हुए तथ्य प्रस्तुत किए थे। ट्रिब्यूनल के न्यायिक सदस्य जस्टिस वीआर किंग वाकर और विशेष सदस्य डा. देवेंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में सात अगस्त 2012 को इस मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण और वन मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर इस मामले में निर्णय लेने को कहा है। कहा गया यदि चार सप्ताह में मंत्रालय ने निर्णय नहीं लिया, तो धारा पांच के तहत लगी रोक स्वत: हट जाएगी।

इंसेट
धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम रद्द
श्रीनगर-चौरास जल विद्युत परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति की ओर से 10 सितंबर तक पूर्व में घोषित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिलवाल, जगत रतूड़ी और महासचिव प्रताप भंडारी ने कहा कि एनजीटी की ओर से पर्यावरण विभाग के निर्णय का इंतजार समिति करेगी। उसके बाद ही आंदोलन के बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।



शिकायत के बाद भी जीवीके के खिलाफ कार्रवाई नहीं
सीमा सड़क संगठन की ओर से जिला प्रशासन को जीवीके द्वारा अलकनंदा को रोककर झील की ऊंचाई बढ़ा दिए जाने से हाईवे को हुई क्षति की शिकायत के बावजूद जिला प्रशासन ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं इस मामले पर जिला प्रशासन मीडिया से कोई वार्ता तक नहीं करना चाहता। लगातार दो दिनों से हाईवे पर पानी भरा होने के कारण वाहन वैकल्पिक संपर्क मार्ग से ही चल रहे हैं, जो यात्रा के लिए कानूनी दृष्टि से अधिकृत मार्ग नहीं है। बीआरओ के द्वितीय कमान अधिकारी एके सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन तथा जीवीके दोनों को ही राष्ट्रीय राजमार्ग को हो रहे नुकसान तथा इसके कारण यात्रियों को हो रही दिक्कत के बारे में लिखा जा चुका है। जीवीके संपर्क मार्ग को भी जल्दी से पूर्ण नहीं कर रही है, ताकि उसे एनओसी दी जाए। अभी तक मार्ग को एनओसी मिले बगैर ही इस मार्ग से यात्रा हो रही है।
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