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जिसे है आशियाना बनाने की चाहत, उसे मिलेगी राहत

Pauri

Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
भवनों के लिए नक्शे पास करने का काम नगर पालिकाओं को देने का आम जनता ने स्वागत किया है। विभिन्न विभागों की एनओसी हासिल करने की राजधानी समेत कई स्थानों की भाग-दौड़, धन के अपव्यय और जटिल प्रक्रिया से छुटकारा मिलने की उम्मीद जताई गई है। लेकिन तात्कालिक रूप से स्टाफ और विशेषज्ञता की कमी की आशंका भी है। पालिकाएं भी मानती हैं कि उनके पास इस काम को संभालने के लिए पर्याप्त अमला नहीं है लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि इससे उनकी मौजूदा दरिद्रता कम होगी। उनकी झोली भरेगी तो लोगों का विकास भी गति पकड़ेगा।
पौड़ी। नई व्यवस्था में नगर पालिका को जिम्मेदारियां मिलने से भवन बनाने की चाहत रखने वाले उत्साहित हैं। शहरवासी धर्मवीर सिंह रावत आदि कहते हैं नक्शा पास करने की जटिलताओं के कारण ही लोग नियमों को ताक पर रखते हैं। प्रक्रिया सरल हो तो नियमों से खिलवाड़ कम हो जाएगा।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी के मुताबिक फिलहाल नई व्यवस्थाओं का शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ है। पालिका के पास पूरी व्यवस्था है। पालिका अध्यक्ष राजेंद्र टम्टा ने इस पहल को जनहित में बताते हुए कहा कि इससे सामान्य आय वर्ग वाले भवन स्वामी को भी बड़ी राहत मिलेगी।

लाभ पाने के लिए बुनियादी ढांचे की दरकार
उत्तरकाशी। बदली व्यवस्था से लोगों को सहूलियत तो मिलेगी बशर्ते इसके अनुरूप बुनियादी ढांचा भी खड़ा किया जाए। गंगोत्री में स्थिति असमंजस वाली है। यहां गंगोत्री प्राधिकरण और नगर पंचायत दोनों ही कामचलाऊ व्यवस्था पर चल रहे हैं। अब तक नक्शे शासन स्तर पर ही पास हो रहे थे।
उत्तरकाशी नगर में एसडीएम के अधीन कार्य कर रहे विनियमित क्षेत्र से तो नक्शा पास कराना पड़ता था। इसकी एनओसी और फीस के लिए नगर पालिका में भी जाना पड़ता था। जल संस्थान और ऊर्जा निगम से भी अलग से एनओसी लेनी पड़ती थी। यदि नगर पालिका को नक्शा पास करने का अधिकार मिल गया तो तकनीकी, फील्ड और ऑफिस स्टाफ की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए शासन स्तर पर पद सृजन की कार्रवाई होगी साथ ही यदि पूर्व की भांति पालिका में जल संस्थान, ऊर्जा निगम का एक-एक स्टाफ भी तैनात रहे तो लोगों को नक्शे पास कराने में आसानी होगी।
यही स्थिति बड़कोट नगर पंचायत की भी है। पुरोला और चिन्यालीसौड़ में भी नगर पंचायत अस्तित्व में आ चुकी हैं। इनमें पद सृजन की कार्रवाई गतिमान है। गंगोत्री में गंगोत्री विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अस्तित्व में था, किंतु एक बाबू और एक चपरासी के भरोसे चल रहे इस प्राधिकरण को एसडीएम और नगर पालिका के जेई की काम चलाऊ व्यवस्था से ही चलाया जा रहा था। गंगोत्री में किसी भी निर्माण का नक्शा शासन स्तर पर ही पास हो रहा था। अब यही स्थिति गंगोत्री नगर पंचायत की है। सीजनल आबादी वाले गंगोत्री नगर पंचायत में कभी चुनाव ही नहीं हुए और यहां भी सभी व्यवस्था उधार के अधिकारी-कर्मचारियों के भरोसे चल रही है।
जिम्मेदारी लेने का कोई फायदा नहीं
नगरपालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान तथा इंजीनियर जितेंद्र कुड़ियाल का कहना है कि जब तक तकनीकी फील्ड तथा कार्यालय के स्टाफ पद सृजित नहीं होते, तब तक नक्शा पास करने की जिम्मेदारी लेने से कोई फायदा नहीं है। सरकार को बड़ी नगर पालिकाओं की भांति यहां भी बिजली और पानी वाले विभाग के कर्मचारियों को तैनात करना पड़ेगा।
टिहरी में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध
नई टिहरी। नई टिहरी नगर पालिका के पास नक्शा पास कराने और कार्य को अंजाम देने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है। जेई, कर्मचारी, कंप्यूटर और कमरे की सुविधा पालिका के पास उपलब्ध है। सिर्फ तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पडे़गी। पालिकाध्यक्ष उमेश चरण गुंसाई कहना है कि सरकार के इस फैसले से निकायों की आय में इजाफा होगा।
जीओ मिले तो देखें कितनी सहूलियत, कितनी दिक्कत
श्रीनगर। नगर पालिका अध्यक्ष मोहन लाल जैन का कहना है कि पालिका में इसके लिए पर्याप्त स्टाफ है। इससे समय की बचत होगी। नियत प्राधिकारी रजा अब्बास का कहना है कि जीओ मिलने के बाद ही इससे होने वाली सुविधाओं और दिक्कतों के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
रुद्रप्रयाग में न जेई, न पटवारी
रुद्रप्रयाग। नगर पालिका परिषद रुद्रप्रयाग में ना तो अवर अभियंता है और ना ही पटवारी। पालिका संविदा के जेई से काम चला रही है। लिपिकों की भी कमी है। वर्तमान में एसडीएम सदर के पास विहित प्राधिकारी के रूप में भवनों का नक्शा पास करने का जिम्मा है। अब यह अधिकार पालिका के अधिशासी अधिकारी को मिल जाएगा। पालिका के ईओ बीपी भट्ट का कहना है कि इस काम के लिए स्टाफ की जरूरत होगी।
नाली, आम रास्तों के लिए झगडे़ बंद होंगे
गोपेश्वर। चमोली में अक्सर भवनों की नालियाें और आम रास्तों के लिए झगड़े होते हैं। नगर में बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर प्रभावी रोक लग जाएगी। जनपद में गोपेश्वर और जोशीमठ नगर पालिका क्षेत्र हैं। अभी तक दोनों प्राधिकरण क्षेत्र में संबंधित तहसील प्रशासन ही नक्शे पास करते थे। कार्य की अधिकता होने से न तो मौके पर भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया जाता था और ना ही बहुमंजिला भवनों के निर्माण कार्य पर रोक लग रही थी। नतीजतन लोग नाली और आम रास्तों पर भी भवनों का निर्माण कर देते थे। गोपेश्वर नगर पालिका के ईओ एसपी भट्ट का कहना है कि जोशीमठ और गोपेश्वर पालिका के पास एक ही जेई है। जिससे दिक्कत हो सकती है। यदि दोनों पालिका क्षेत्र में जेई मिल जाते हैं तो दिक्कत दूर हो जाएगी।
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