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45 साल का हिस्ट्रीशीटर 45 बाद हॉकर

Nainital

Updated Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
हल्द्वानी। 45 साल पहले मुजम्मिल सिद्दकी नाम का दबंग युवक जब हल्द्वानी की सड़कों में निकलता था तो आवाज में हनक होती। लेकिन ठीक 45 वर्ष बाद वही आवाज हर नई सुबह इस शहर की सड़क, गली, नुक्कड़ और घरों के आगे गूंजते हुए पुकारती है..‘पेपर वाला’। कहते हैं इंसान जन्म से अपराधी नहीं होता, कई बार व्यवस्था या फिर ये समाज उसे मजबूर करता है। एक दौर में पुलिस के क्राइम रिकार्ड में ‘ए’ श्रेणी का हिस्ट्रीशीटर जब अखबार बांटने वाला हॉकर बनता है तो यह कहानी प्रेरणा से भर जाती है। मुफलिसी से लड़ने की प्रेरणा। जरायम की दुनिया को मिटाने की प्रेरणा। पुलिस के लिए यह नाम बेशक अपराधी का है, लेकिन समाज के लिए मुजम्मिल एक मेहनतकश इंसान।
मुस्लिम बाहुल्य वनभूलपुरा इलाके के आजादनगर में मुजम्मिल सिद्दकी 60 के दशक में एक दबंग लड़ाकू किशोर के रूप में पहचाना जाता था। अपनी युवावस्था में आते ही 1967 में वह मारपीट कर भागने वाला क्रिमिनल बना तो कानून की फाइल में भी उसका खाता खुला। आईपीसी की धारा 224 में इस युवक पर पहला मुकदमा हुआ और यहीं से हुई ‘ए’ श्रेणी के हिस्ट्रीशीटर के अपराध की शुरूआत। कानून की नजर में कैद मुजम्मिल पर 1976 में आईपीसी-392 में फिर मुकदमा हुआ। उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की निगाह तो रहती थी, लेकिन दबंगई का अंत नहीं हुआ।
अपने इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे शहर में 30 साल की उम्र में पहुंचने के बाद ये युवक पैठ बना चुका था। 1997 में मुजम्मिल पर आखिरी मुकदमा 41/109 में हुआ और उसके आगे क्राइम डायरी खाली है। क्योंकि 97 के बाद ही इस अपराधी ने खुद को अपराध से मुक्त कर मुफलिसी में जीना सीखा। आज मुजम्मिल रोज सुबह उठकर तमाम हिंदी-अंग्रेजी अखबारों का बंडल पकड़ता है और हर दिशा में पैदल घूमता है। कभी ढाई सौ तो कभी 350 अखबार बेच डालता है। महीने में मुजम्मिल की आय अखबार से तीन से साढ़े तीन हजार रुपये तक है। अखबार बांटने के बाद वह होटल या दुकानों में भी काम कर लेता है। कभी कोतवाली पहुंचकर गमलों में पानी देता है तो पुलिस वाले ही उसे कुछ जेब खर्च दे देते हैं। मुजम्मिल ने शादी नहीं की। पुलिस के रिकार्ड के आधार पर उम्र के 67वें और असल में 55वें पड़ाव में पहुंचा यह व्यक्ति एकाकी जीवन जीते हुए ही गरीबी से लड़ता है। उसके मुंह से निकलने वाली आवाज ...पेपर, अपराधी से मेहनतकश बनने के लिए प्रेरित करती है।
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