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पहाड़ के अहसास ने दिलाया दाम और मान

Nainital

Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। कद्र, कुशलता और कद्रदान। यह वह तीन शब्द हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर से शुरू किए व्यापार को नई पहचान दिलाई। बात हो रही नैनीताल के कुमाऊं वूलेंस की। जिन्होंने हैंडलूम में परंपरागत खूबियों को शामिल किया, फैशन के साथ कदम मिलाने और मार्केटिंग में कुशलता दिखाई, इसके बाद कुछ हटकर, खास की चाह रखने वाले कद्रदानों की कोई कमी नहीं रही। जो पहाड़ आने के साथ उसके अहसास को ट्ीवड (परंपरागत तरीके से बना कोट का कपड़ा) शाल आदि के रूप में अपने वतन ले जाते हैं।
अपनी परंपरागत, स्थानीय खूबियों को सहेज कर कुमाऊं वूलेंस के साथ 1973 में कन्हैया लाल टंडन ने अल्मोड़ा में शुरुआत की। वह पहाड़ की विशेषताओं (विशेषकर अल्मोड़ा ट्ीवड) को हैंडलूम से शामिल कर शुरू किया। देखते-देखते मांग बढ़ने लगी। वह करीब 20 साल पहले अपना व्यापार और फैक्ट्री को लेकर हल्द्वानी आ गये। फैक्ट्री लामाचौड़ में लगाई गई और मार्केटिंग नैनीताल में कैपिटल सिनेमा स्थित दुकान से शुरू की गई। श्री टंडन कहते हैं पहाड़ में आने वाले सैलानी यहां की खूबी किसी न किसी रूप में संजोकर ले जाना चाहते हैं, जो उस क्षेत्र की खूबी को बताए। इसी को देखते हुए उन्होंने पहाड़ के ट्ीवड को ब्रांड बनाया। उसको हैंडलूम विधि से खड्डी पर तैयार किया जाता है। ट्ीवड का कोट या दूसरे उत्पाद विशिष्ट होने का अहसास दिलाते हैं। इसमें होरिंग बोन, हाउंस ट्रूथ, शेफर्ड चेक, स्ट्राइपड ज्यादा पसंद किए जाते हैं। इसी तरह प्योरवूल के बनने उत्पाद की डिमांड खूब है। वह बताते हैं कि जो फैशन दिखाई दे रहा है, उसका 18 महीने पहले ही पूर्वानुमान लगाया जाता है, इस फोरकॉस्ट के हिसाब से उत्पादों को तैयार किया जाता है, जो कलर, स्टाइल के मामले में किसी से पीछे नहीं हो। हम देश में 80 जगह उत्पाद को भेजते हैं, वह सब अलग-अलग होते हैं। जिससे यूनिक बात बनी रहती है।

काम के साथ पढ़ाई भी
हल्द्वानी। फैक्ट्री में करीब 45 लोग काम करते हैं, जिसमें अधिकांश लड़कियां हैं। इसमें से अधिकांश लड़कियां विश्वविद्यालय से जुड़ कर स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई भी कर रही हैं। उन्होंने स्वावलंबन की नई राह भी दिखाई है।
क्या है ट्ीवड
हल्द्वानी। ट्ीवड एक स्कॉटिश शब्द है, जो कि ट्ीवल के त्रुटिपूर्वक लिखे जाने पर अस्तित्व में आया। ट्ीवड की शुरुआत स्काटलैंड-आयरलैंड में हुई, बाद में इसको फैशन और ब्रांड लंदन के कारीगराें ने बना दिया। हैंडीक्राफ्ट विधि से तैयार ट्ीवड के परिधान जेंटलमैन की पहचान थी, जिसे अभिजात्य वर्ग के लोग पहनते थे।
तरह-तरह के पेड़-पौधे
हल्द्वानी। फैक्ट्री में छोटा सा जंगल भी तैयार किया गया है। जहां चीड़, चंदन से लेकर थाइलैंड का ड्रैगन कैक्टस जैसे तरह-तरह की प्रजाति के पेड़ पौधे लगे हैं।
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