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मोबाइल टावर की पहरेदारी में खत्म होती जिंदगी

Nainital

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
हल्द्वानी। मोबाइल टावर की घातक तरंगों को मानव स्वास्थ्य, पक्षियों और जानवरों के लिए घातक माना गया है। रेडिएशन के प्रभाव से तमाम तकलीफें शुरू होने लगती हैं और इन्हीं टावरों की पहरेदारी में खत्म हो रहा है चौकीदारों जीवन। जिस स्थान पर टावर लगा हो, उसके रेडिएशन का प्रभाव दूर-दूर तक रहता है। इस सच के बावजूद बतौर चौकीदार जिंदगी टावर की जड़ में जमी है।
हल्द्वानी शहर में ही भारत संचार निगम लिमिटेड समेत अन्य निजी कंपनियों के करीब 160 से ज्यादा टावर लगे हैं। इनमें से सौ से ज्यादा टावरों की सुरक्षा के लिए कंपनियों ने रात-दिन के चौकीदारों की व्यवस्था की है। इनके रहने का इंतजाम टावर के नीचे बने आपरेटिंग रूम में होता है। कुछ टावरों को बिजली जाने पर जेनरेटर से चालू करना पड़ता है तो कुछ में आटोमेटिक जेनरेटर लगे हैं। हल्द्वानी ही नहीं बल्कि समूचे पहाड़ में टावरों की देखभाल चौकीदारों के भरोसे रहती है, लेकिन पहरा देने वाले खतरे से अंजान हैं।
टावर की जड़ में रेडिएशन का कितना प्रभाव रहता होगा, यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन चौकीदारों की गरीबी के सामने पैसा सब कुछ है, स्वास्थ्य नहीं। अमर उजाला ने मंगलवार को शहर के एक दर्जन टावरों में तैनात चौकीदारों से बात की तो किसी को भी रेडिएशन का ज्ञान नहीं था।
----इंसेट----
रेडिएशन का प्रभाव
मोबाइल टावरों के रेडिएशन के प्रभाव से समय से पहले बुढ़ापा, पागलपन, स्वलीनता, थकान और सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ आदि बीमारियां पैदा होने लगती हैं। डाक्टरों का यह मानना है कि रेडिएशन का प्रभाव शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है और इसके करीब रहने वाले लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय के रेडियोलाजिस्ट डा. एलएम रखोलिया का कहना है कि मोबाइल टावर के इर्द-गिर्द जो लोग सुरक्षा पर रहते हैं, जाहिर है उनके स्वास्थ्य के लिए रेडिएशन घातक होगा।
केस-1
मदन लाल (काल्पनिक नाम) हल्द्वानी में चार वर्ष से एक निजी कंपनी के मोबाइल टावर में बतौर चौकीदार काम करते हैं। 39 साल की उम्र और आठ घंटे की ड्यूटी। वह भी टावर की जड़ में रहकर। रानीखेत के रहने वाले मदन को मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगों का कोई ज्ञान नहीं है। सिर्फ चौकीदारी कर माह में मिल रही थोड़ी सी पगार से ही उन्हें मतलब है।
केस-2
मुरादाबाद के रोशन कुमार (काल्पनिक नाम) को एक साल पहले ही टावर की चौकीदारी का काम मिला है। वह रेडिएशन नहीं जानता, पर कभी-कभी शारीरिक तकलीफ जैसे, सिरदर्द होने थकान लगने आदि शिकायतों की बात करता है।
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