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एनओसी से ट्रांसफर शस्त्र लाइसेंस होंगे निरस्त

Nainital

Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। शराब व्यवसायी पोंटी चड्डा हत्याकांड के बाद उत्तराखंड सरकार ने बाहरी राज्यों से बने शस्त्र लाइसेंसों के एनओसी के आधार पर उत्तराखंड में ट्रांसफर हुए शस्त्र लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए हैं। प्रमुख सचिव के आदेश पर कुमाऊं के सभी जिलों में एनओसी से ट्रांसफर लाइसेंसों की जांच शुरू कर दी है। दो दिन के भीतर सभी जिलाधिकारियों को इसकी रिपोर्ट शासन को देनी है। ऊधमसिंह नगर जिले में एनओसी के आधार पर ट्रांसफर 385 शस्त्र लाइसेंसों के निरस्त होने से हड़कंप मचा है।
उत्तराखंड में शस्त्र लाइसेंस कई बिंदुओं पर पुलिस, एलआईयू और राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही डीएम कार्यालय से जारी होता है। इन प्रक्रियाओं को पूरा नहीं कर पाने वाले लोग आसानी से पंजाब, आसाम और जम्मू से शस्त्र लाइसेंस जारी करवा लेते हैं। बाद में एनओसी के आधार पर उत्तराखंड में ट्रांसफर करवा लेते हैं। एनओसी ट्रांसफर की व्यवस्था सेवारत फौजियों की सहूलियत के लिए बनाई गई थी। लेकिन इस शार्टकट व्यवस्था को आम लोगों ने भी अपना लिया है। उत्तराखंड में एनओसी के आधार पर ट्रांसफर शस्त्र लाइसेंसों की संख्या हजारों में है।
शराब व्यवसायी पोंटी चड्डा हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आए सुखदेव सिंह नामधारी और उसके साथियों के बाहरी राज्यों से बने शस्त्र लाइसेंस में गड़बड़ी पकड़ी जाने के बाद प्रदेश सरकार ने एहतियातन एनओसी के आधार पर ट्रांसफर शस्त्र लाइसेंस की जांच शुरू कर दी है। प्रमुख सचिव ने बाहरी राज्यों से बने शस्त्र लाइसेंसों के एनओसी के आधार पर उत्तराखंड के जिलों में ट्रांसफर होने वाले शस्त्र लाइसेंसों को निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊधमसिंह नगर जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 385 लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। नैनीताल जिले में दस हजार शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें करीब चार हजार लाइसेंस बाहरी राज्यों से बने हैं और एनओसी के आधार पर जिले में पंजीकृत हैं। इसी तरह अल्मोड़ा, बागेश्वर में, पिथौरागढ़ और चंपावत में भी बाहरी राज्यों से जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच शुरू हो गई है। सभी जिलों के जिलाधिकारियों को दो दिन के भीतर शस्त्र लाइसेंसों की जांच कर रिपोर्ट सरकार को देनी है।

आल इंडिया शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया है जटिल
आल इंडिया शस्त्र लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। किसी भी प्रदेश से बनने वाले शस्त्र लाइसेंस की एक निर्धारित सीमा तय होती है। प्रदेश सरकार अधिकतम अपने पड़ोसी दो राज्यों तक का ही लाइसेंस जारी कर सकती है। बाकी राज्यों (आल इंडिया) के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से ही शस्त्र लाइसेंस की स्वीकृति मिलती है। उत्तराखंड सरकार पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश और हिमाचल तक के लिए लाइसेंस जारी कर सकती है।

पंजाब से ट्रांसफर लाइसेंसों पर दर्ज हैं तीन तीन असलहे
कुमाऊं के तराई भाबर में हजारों लाइसेंस पंजाब, जम्मू, नागालैंड, आसाम से बने हैं। इन राज्यों से शस्त्र लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया आसान है। इन राज्यों से लाइसेंस जारी करवाने वालों में फौजियों की संख्या काफी अधिक है। ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर, काशीपुर और बाजपुर में सैकड़ों लोगों के लाइसेंस पंजाब से बने हैं। इनमें कई लोगों के एक ही लाइसेंस में तीन तीन हथियार (12 बोर, पिस्टल/रिवाल्वर और राइफल) दर्ज हैं। उत्तराखंड में एक लाइसेंस पर केवल एक ही असलहा दर्ज होता है।

एनओसी ट्रांसफर में नहीं होता है लाइसेंस सीमा का विस्तार
यदि किसी व्यक्ति का उत्तराखंड से शस्त्र लाइसेंस जारी है और उसे लाइसेंस की सीमा उत्तराखंड से बढ़ाकर उत्तरप्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक करनी है तो आवेदक को संबंधित जिले के डीएम के माध्यम से उत्तराखंड सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार से अनुमति जारी होने के बाद ही उत्तराखंड का लाइसेंस हिमाचल और उत्तरप्रदेश में वैध माना जाएगा। एनओसी ट्रांसफर की प्रक्रिया में सीमा विस्तार नहीं होता है। मसलन, उत्तराखंड का कोई फौजी जम्मू में तैनात है। फौजी जम्मू में शस्त्र लाइसेंस बनाकर उसे एनओसी के आधार पर उत्तराखंड के किसी भी जिले में ट्रांसफर करा सकता है। ट्रांसफर होने के बाद लाइसेंस जम्मू से खत्म होकर उत्तराखंड में वैध माना जाएगा।
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