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कहीं पारिवारिक अनबन का कारण न बनें नियम

Nainital

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। भारत सरकार ने गैस का सालाना कोटा तय किया यहां तक तो बात ठीक, लेकिन तेल कंपनियों की गाइडलाइन पारिवारिक अनबन का कारण बन सकती है। अगर एक घर में परिवार के चार सदस्य रहते हैं और उनके चूल्हे अलग-अलग जल रहे हैं तो केवल एक ही सदस्य को सब्सिडी का सिलेंडर मिलेगा। बाकी बिना रियायत के चूल्हा जलाएंगे। सब्सिडी के लिए उन्हें अलग पता या परिवार से अलग रहने का प्रमाण देना होगा। कंपनियों का यह नियम उपभोक्ताओं के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है।
जिनका परिवार संयुक्त रूप से एक ही मकान में अलग-अलग रहता है, उनके पतों में समानता होने से तेल कंपनियों ने इस वक्त उनके कनेक्शन ब्लाक कर रखे हैं। सत्यापन के बाद उनका कनेक्शन तो खुल जाएगा, लेकिन उपभोक्ता को अपना पता तथा घर का नंबर अलग-अलग देना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वर्षभर उसे गैर रियायत सिलेंडर ही मिलेगा। एक पते और मकान नंबर पर परिवार के एक ही सदस्य को सिलेंडरों में सब्सिडी मिलेगी। संयुक्त परिवार इस समय पशोपेश की स्थिति में हैं कि आखिर सब्सिडी का सिलेंडर किसके खाते में आएगा। यही नहीं पता बदलवाना भी चुनौती बन रहा है।
तेल कंपनियों का यह नियम हालांकि अभी सत्यापन कार्य के चलते लागू नहीं हुआ है, लेकिन वो लोग इस गाइडलाइन से इसलिए परेशान हैं क्योंकि एक अदद सिलेंडर के लिए वर्षों बाद उनके सामने नई दिक्कतें आई हैं। जिला पूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि तेल कंपनियों की गाइडलाइन अभी गैस एजेंसियों के पास आ रही हैं। गाइडलाइन में इस तरह का नियम हैं, पर नए नियमों में शर्तें रखने के साथ उसके समाधान का भी उल्लेख है। गैस एजेंसियों से संपर्क कर उपभोक्ता गाइडलाइन के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।


इंसेट
दोहरा नियम भी बना आफत
कनेक्शन सत्यापन के समय कुछ गैस एजेंसियों ने केवाईसी फार्म के साथ गैस के कागज, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड अनिवार्य कर रखा है। जबकि तेल कंपनियों ने राशन कार्ड की बाध्यता नहीं रखी है। इस दोहरे नियम से वो लोग परेशानी झेल रहे हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं। जिला पूर्ति अधिकारी का कहना है कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, वह दूसरा पहचानपत्र लगाकर सत्यापन करा सकते हैं। अगर एजेंसियों के स्तर से राशन कार्ड मांगा जाता है तो इसकी शिकायत की जाए।
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