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कहीं ठेके पर तो नहीं चलेगा बिजली विभाग?

Nainital

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। उत्तराखंड ने यूपी से अलग होने के बाद क्या पहचान बनाई यह तो राज्य का हर नागरिक जानता है, लेकिन इस हिमालयी राज्य की भावी तस्वीर कुछ अच्छी नहीं लगती है। सरकारी स्कूल और अस्पताल पीपीपी मोड पर चलाने की मंशा जताकर सरकार का अगला निशाना बिजली महकमे पर हो सकता है। इस विभाग के मौजूदा हाल तो कम से कम यही इशारा करते हैं। जिस फील्ड, तकनीकी स्टाफ को ऊर्जा निगम की रीढ़ माना जाता है उन्हीं पदों पर सरकार ने तलवार मारी है। यूपी के समय से चले आ रहे इस महकमे के ढांचे में पिछले 12 साल से प्रदेश चल रहा है और यह ढांचा सुधरने के बजाए कई महत्वपूर्ण पद विलुप्त हो गए हैं।
तकनीकी कर्मचारियों का यूपी के दौर में ही जब वर्गीकरण हुआ था तो इसमें मुख्य रूप से लाइन कुली, बिल रनर, कंट्रोल रूम सहायक, पेट्रोलमैन, फ्यूजमैन, मैसेन्जर, टेलीफोन अटेंडेंट, फिटर, लाइनमैन, मीटर रीडर, जूनियर इलेक्ट्रीशियन, जूनियर मीटर टेस्टर, कंट्रोल रूम आपरेटर, टीजी-2 (लाइन), टीजी-2 (विद्युत), टीजी-1 (विद्युत), टीजी-2 (लाइन) और केबल ज्वाइंटर के पद सृजित किए गए थे। 1985 के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन पदों पर नियुक्तियां बंद कर दी और जो कर्मचारी पहले से तैनात थे उन्हीं से काम चलाया गया। अपना उत्तराखंड भी यूपी के ही नक्शे कदम पर चला है।
इन पदों के नाम से ही इनका काम भी जाहिर होता है। हालात यह हैं कि उत्तराखंड सरकार ने बिजली विभाग के इन महत्वपूर्ण पदों को बचाने के बजाए समाप्त कर दिया है। नए पदों को टीजी-1 (विद्युत, लाइन) और टीजी-2 (विद्युत, लाइन) में मर्ज कर दिया गया है। सबसे बड़ी मुसीबत ऊर्जा निगम के सामने खड़ी हुई है। सरकारी नीतियों ने इस विभाग को पैदल कर दिया है। यूपीसीएल के पास आज बिल बांटने, केबिल जोड़ने, फ्यूज जोड़ने या फिर लाइन में पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों का घोर अकाल है। बिजलीघर चलाने के लिए तक आपरेटरों की घोर कमी है। ऊर्जा निगम के एमडी एके जौहरी ने पदों को आउटसोर्सिंग से भरकर विभागीय कामकाज चलाने का दावा तो किया है, लेकिन सरकार की मंशा सच होगी या यह दावा वक्त बताएगा।
इंसेट
विलुप्त होते पद
मैसेंजर, टेलीफोन अटेंडेंट, कंट्रोल रूम सहायक, फ्यूज मैन, बिल रनर, फिटर, जूनियर इलेक्ट्रीशियन और केबिल ज्वाइंटर
इंसेट
हर डिवीजन के हाल खराब
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के पास कुमाऊं के सभी 13 डिवीजनों में फील्ड तकनीकी स्टाफ का भारी अकाल है। इससे विभागीय कामकाज पर असर पड़ रहा है इसे खुद विभाग के अधिकारी भी मानते हैं। अगर इन पदों पर नियुक्तियां होती तो राज्य के नौजवान बेरोजगारों को रोजगार मिलता।
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