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फोरम से उपभोक्ताओं को मिली आठ लाख की राहत

Nainital

Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच ने दो अलग-अलग मामलों में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए आठ लाख रुपये की पेनाल्टी माफ की। एक मामले में पावर कारपोरेशन ने उपभोक्ता को दो साल बाद 3.67 लाख रुपये का पीक आवर पेनाल्टी का बिल भेजा था जबकि दूसरे उपभोक्ता पर गलत एमआरआई (मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट) लोड सर्वे के आधार पर 4.8 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई गई थी।
काशीपुर की श्याम पल्प एंड बोर्ड मिल्स कंपनी ने विद्युत उपभोक्ता निवारण मंच में शिकायत दर्ज की थी। इसके मुताबिक उत्तराखंड पावर कारपोरेशन ने जून 2009 में प्रतिबंधित समय में बिजली का उपयोग करने के मामले में चार फरवरी 2012 को 3.67 लाख रुपये का बिल भेजा। श्याम पल्प की ओर से कहा गया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56 (2) के मुताबिक पावर कारपोरेशन दो वर्ष के पश्चात उपभोक्ता से कोई अवशेष, नहीं वसूल सकता। कारपोरेशन ने बिल को सही बताया लेकिन दो वर्ष की लंबी समयावधि तक बिल नहीं देने का कोई ठोस तर्क पेश नहीं किया। उपभोक्ता निवारण मंच सदस्यों अमरजीत सिंह, पीसी पंत और मनीष ओली ने श्याम पल्प एंड बोर्ड मिल्स के तर्क व साक्ष्यों से सहमत होते हुए 3.67 लाख की पेनाल्टी हटाने के निर्देश दिए। दूसरे मामले में रुद्रपुर की न्यू एलनबेरी वर्क्स कंपनी ने 2010 में प्रतिबंधित समय में बिजली उपयोग करने पर 4.80 लाख की पेनाल्टी लगाने का जिक्र किया था। कंपनी ने कहा कि एमआरआई लोड सर्वे में आठ फरवरी से 31 मार्च 2010 तक रात 10 से 11 बजे के बीच लगाई पेनाल्टी गलत है। फोरम ने मामले में संबंधित सबस्टेशन की लाग बुक और तत्कालीन टेंपर रिपोर्ट का अध्ययन किया। जिसमें साफ था कि एमआरआई लोड सर्वे की टाइमिंग और लाग बुक और टेंपर रिपोर्ट की टाइमिंग में एक घंटे का अंतर है। कारपोरेशन इस एक घंटे के अंतर को स्पष्ट नहीं कर सका। फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय देते हुए रात 10 से 11 बजे के बीच लगाई गई पीक आवर पेनाल्टी हटा दी। फोरम सदस्यों ने बताया कि एमआरआई प्रणाली में दिख रही त्रुटि को फोरम ने गंभीरता से लिया है। अपने आदेश में फोरम ने कहा कि एमआरआई प्रणाली को बेहद विश्वसनीय माना जाता है। लिहाजा टेंपर रिपोर्ट और एमआरआई लोड सर्वे के समय में दिख रहा अंतर गंभीर मामला है। फोरम ने मामले की जांच की आवश्यकता बताई।
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