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गौला बैराज की तरफ सरकार की पीठ

Nainital

Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। विकास कार्यों के लिए समय पर धन नहीं देना या फिर स्वीकृत धनराशि को लटकाना। यह उलझन तो राज्य बनने के बाद से ही रही है, पर हल्द्वानी को पानी देने वाले गौला बैराज की तरफ भी सरकार की पीठ है। दो साल से बैराज के गेटों की मरम्मत को सिंचाई विभाग को धेला भी नहीं दिया गया है और ऐसे में बैराज पर भरोसे की नींव भी हिलने लगी है, क्योंकि अगर छह गेटों में से किसी को नुकसान होता है तो इससे बड़े एरिया में फैले बैराज के लिए खतरा पैदा होगा और साथ में भाबर के लिए जल संकट भी।
गौला बैराज की 2010 के बाद मरम्मत नहीं हुई है। इसमें कुल छह गेट लगे हैं। कायदे से हर छह माह या फिर सालभर में एक बार बैराज के गेटों की रिपेयरिंग जरूरी होती है। इस काम के लिए कम से कम 25 लाख रुपये सालाना चाहिए। सिंचाई विभाग ने वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 में जो प्रस्ताव भेजा था, उसे शासन ने मंजूरी नहीं दी। उससे भी ताज्जुब की बात यह है कि 19 साल पहले यानि 1993 में जब बाढ़ से बैराज को क्षति पहुंची थी तो उसे रिपेयर करने में लाखों रुपये खर्च हुए थे। यूपी के समय की करीब 15 लाख रुपये की अवशेष राशि भी आज तक सिंचाई विभाग को नहीं मिल पाई है।
इस समय गौला में पानी का प्रवाह कम है और गेटों पर भी ज्यादा दबाव नहीं, पर प्रवाह बढ़ने पर पल-पल में गेट खोलने, बंद करने पड़ते हैं। सिंचाई विभाग को अभी बैराज के गेटों पर भरोसा तो है, पर बिना मरम्मत के ये कब तक टिके रहेंगे यह बता पाने की स्थिति में खुद विभाग भी नहीं। छह गेटों का आटो तथा मैनुअल आपरेटिंग सिस्टम लकड़ी के जिन कच्चे डैकों पर अटका हुआ है उसे भी पक्का किया जाना है और यह सब काम तभी पूरा होगा जब सरकार की रहमत बरसेगी। वरना आने वाला कल बैराज के लिए धुंधला साबित हो सकता है।

इंसेट
यहां जाता है पानी
गौला बैराज से हल्द्वानी को पेयजल और देवलचौड़, लामाचौड़ तथा लालकुआं के काश्तकारों की करीब दस हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सींचने के लिए पानी दिया जाता है। बैराज से ही एक नहर गौलापार के लिए भी गई है और वहां भी डेढ़ से दो हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है।

इंसेट
मरम्मत के लिए धनराशि नहीं मिल पाने से काम नहीं हो पाया है। इसके लिए लगातार शासन को लिखा जा रहा है। सिंचाई मंत्री के सामने भी यह बात रखी जाएगी। -एमसी पांडे, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड हल्द्वानी।
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