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अब कागज खरीदने को भी पैसा नहीं

Nainital

Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। यह अदूरदर्शिता का रिजल्ट है। पहले विभाग बनाया, उसमें इंजीनियर से लेकर कार्यालयी कर्मचारी भरे और अंत में ठेंगा। अब तो कागज खरीदने के लिए भी पैसा नहीं। उधारी चल रही है। वक्त के साथ विभाग घिस रहा है। यदि कार्यालयी कामकाज की मशीनें खराब हो जाएं, तो मरम्मत में जेब से पैसा जाए और कागज नहीं है तो उसे खरीदने में भी जेब ढीली। ये बदतर स्थिति 30 साल पुराने जमरानी खंड की है। सरकार की बेरुखी यह साफ कह रही है कि जब तक बांध नहीं, तब तक पैसा भी नहीं।
कर्मचारियों की तनख्वाह को छोड़कर पिछले आठ माह से जमरानी खंड को एक पैसा नहीं मिला है। हाल ये हैं कि दफ्तर का संचालन तक कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो गया है। क्योंकि सरकारी विभाग है तो कोई न कोई काम यहां चलता रहता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि कागजों को खरीदने में तक कर्मचारी खुद ही पैसा खर्च कर रहे हैं। आठ महीने से खर्चे के जो बिल बने हैं उन्हें भी शासन ने लटका दिया है। कार्यालय में लगी मशीनों की मरम्मत में ही हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं और यह सब उधारी पर चल रहा है।
यही नहीं कर्मचारियों को दफ्तर में मिलने वाली सुविधाएं तक बंद की जा चुकी हैं। अधिकारियों के स्तर से कई दफा शासन को पत्राचार किया जा चुका है, मगर किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिलने से इस विभाग में तैनात इंजीनियरों और कर्मचारियों में निराशा है। वर्ष 1982 में उत्तर प्रदेश के समय जमरानी बांध के नाम पर यह विभाग बनाया गया था। पिछले 12 साल से उत्तराखंड सरकार इसे ढो रही है। क्योंकि बांध अब तक दूर की कौड़ी है। बजट बंद करने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि देरसबेर विभाग इस खंड को ही बंद न कर दे। क्योंकि खंड जमरानी के नाम से है और जमरानी बांध कल्पनाओं में।

कालोनी में पानी नहीं
दमुवाढुंगा में स्थित जमरानी खंड में कर्मचारियों के लिए आवास बनाए गए हैं। आवास में 30 साल से पानी की कोई व्यवस्था नहीं। कालोनी के लिए अलग से ट्यूबवेल निर्माण का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया, पर इसके लिए पैसा नहीं मिलने से अब भी अधिकारी-कर्मचारी पानी का संकट झेलते हैं। जमरानी खंड में दूसरे तकनीकी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा स्टाफ है। यहां एक एसई, दो ईई, दस एई, पांच जेई को समेत एक सौ कर्मचारी कार्यालय कामकाज के लिए रखे गए हैं।
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