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राजमा और दाल के दानों को तरसे बच्चे

Nainital

Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। सरकारी स्कूलों में पहले सिलेंडर की कीमतों में लगी आग ने बच्चों के मिड-डे-मील का स्वाद खराब किया अब दाल और राजम की बढ़ी कीमतों ने मिड-डे-मील का मेन्यू गड़बड़ा दिया है। कई स्कूल तो दाल और राजमा की जगह आलू-लौकी बच्चों को खिला रहे हैं। कुछ स्कूल दाल और राजमा बना भी दे रहे है तो उसमें बच्चे राजमा और दाल के दाने ही खोजते रह जा रहे हैं। बच्चों को भरपेट भोजन मिलना दूभर हो गया है।
बता दें कि जिले में 955 प्राइमरी और 438 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें अध्ययनरत 77 हजार बच्चों को मध्याह्न भोजन देने पर प्रतिमाह 97 लाख खर्च होता है। इसमें से भोजन सामग्री पर 58 लाख 17 हजार 305 रुपये और भोजन माताओं के मानदेय पर 38 लाख 58 हजार व्यय होता है। शिक्षा विभाग ने बच्चों को मध्याह्न भोजन देने के लिए बाकायदा मीनू भी निर्धारित किया हुआ है। इसके बावजूद स्कूलों में बच्चों को भरपेट और पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। सप्ताह में एक दिन राजमा तो एक दिन दाल तो तीसरे दिन छोले चावल दिए जाने चाहिए, साथ में हरी सब्जी भी बच्चों को मिलनी चाहिए मगर राजमा, दाल और छोले की कीमतें बढ़ने के कारण स्कूलों ने इन चीजों को बनाना बंद कर दिया है। अगर किसी दिन बनाना मजबूरी भी हो तो दाल, राजमा की सब्जी में पानी ही पानी होगा। इतना ही नहीं मसाले और घी तेल का इस्तेमाल करने में भी कंजूसी की जा रही है। स्कूलों ने मध्याह्न भोजन में हरी सब्जी की कटौती करने के साथ ही भोजन की मात्रा में भी कमी कर दी है। स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन देने में कोई गड़बड़ी तो नहीं हो रही इसकी जांच को विभागीय स्तर पर कोई टीम तक गठित नहीं है लिहाजा स्कूलों में मनमानी चल रही है।


इंसेट
स्कूल - बच्चों की संख्या
प्राइमरी स्कूल 955 - 44,257
उच्च प्राथमिक स्कूल 438 - 33,047
भोजन माता (प्राइमरी स्कूल) 1648
प्राइमरी की भोजन माताओं का मानदेय - 24,72000
भोेजन माता (उच्च प्राथमिक स्कूल) - 924
उच्च प्राथमिक की भोजन माताओं का मानदेय - 13,86000
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प्रतिदिन मध्याह्न भोजन का निर्धारित वजन
प्राइमरी स्कूल के बच्चे को - 100 ग्राम चावल
उच्च प्राथमिक स्कूल के बच्चे को- 150 ग्राम चावल
दाल, राजमा आदि की मात्रा - 20 ग्राम

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इंसेट
शिक्षा विभाग द्वारा प्राइमरी स्कूल को प्रति बच्चे के हिसाब से तीन रुपये 15 पैसे और उच्च प्राथमिक स्कूल को प्रति बच्चे के हिसाब से चार रुपये 65 पैसे प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। यह राशि दाल, राजमा और सब्जी के अलावा घी, तेल, मसाले आदि की व्यवस्था करने के लिए दिए जाते हैं। चावल सरकार की ओर से मुफ्त में मिलता है।

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स्कूलों को स्पष्ट निर्देश हैं कि बच्चों को रोजाना बदल - बदल कर दाल- सब्जी मध्याह्न भोजन में दिया जाए। अगर किसी स्कूल में मीनू के हिसाब से मध्याह्न भोजन नहीं बनाया जा रहा है या बच्चों को भोजन निर्धारित मात्रा से कम दिया जा रहा है तो इसकी औचक निरीक्षण की चेकिंग की जाएगी तथा गड़बड़ी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आरसी पुरोहित, जिला परियोजना अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक)
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