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ट्यूबवेलों का जाल बिछाना नहीं है समाधान

Nainital

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से भविष्य में गंभीर पेयजल संकट के आसार हैं। समाधान के नाम पर शासन से नए ट्यूबवेल स्वीकृत किए गए हैं लेकिन लाइनों का पुनर्गठन नहीं किए जाने से इसका फायदा क्षेत्रवासियों को नहीं मिल रहा है। पेयजल जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए भाजपा और कांग्रेस की सरकारें कभी गंभीर नहीं रहीं। जिस कारण क्षेत्र में पेयजल संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। क्षेत्र में पहले से ही चार दर्जन ट्यूबवेल होने के बावजूद शासन ने 12 नए ट्यूबवेल स्वीकृत किए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक लाइनें बदले बगैर ट्यूबवेलों का जाल बिछाने से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
पेयजल महकमे के सूत्रों के मुताबिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था गौला नदी और ट्यूबवेलों पर निर्भर है। पैंतालीस साल से अधिक पुरानी पेयजल योजना का आज तक पुनर्गठन नहीं किया गया है। योजना का पुनर्गठन नहीं होने और लाइनों को नहीं बदले जाने से सालभर पेयजल संकट बना रहता है। क्षेत्र की मौजूदा आबादी से अधिक पानी उपलब्ध होने के बावजूद अधिकांश इलाकों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पेयजल लाइनों का पुनर्गठन किए बगैर पेयजल सप्लाई सामान्य होना संभव नहीं है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता केसी पांडे का कहना है कि गौला और ट्यूबवेलों से पर्याप्त पानी मिल रहा है लेकिन लाइनें छोटी पड़ जाने से संकट बना हुआ है। उनका कहना है कि लाइनों का पुनर्गठन किया जाना जरूरी है। बगैर लाइनों को बदले सप्लाई सामान्य करना मुश्किल है।

ग्रामीण में 35 और शहर में हैं 16 ट्यूबवेल
हल्द्वानी के शहरी क्षेत्र में 16 और ग्रामीण क्षेत्र में 35 ट्यूबवेल पहले से ही स्थापित है। शहर में स्थापित ट्यूबवेलों से 9.68 एमएलडी पानी मिलता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 35 ट्यूबवेलों से 25.2 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। गौला नदी से शहर को 34 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर की मौजूदा आबादी के लिए मात्र 34 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि ट्यूबवेलों और गौला से मिलाकर 43.68 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर की आबादी से अधिक पानी उपलब्ध होने के बावजूद शहरवासी प्यासे हैं। नए ट्यूबवेलों के कैसे प्यास बुझाई जाएगी, यह समझने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है। शहर के ग्रामीण इलाकों के लिए मानक के तहत करीब 15 एमएलडी पानी की जरूरत है। यहां भी 10 एमएलडी पानी अधिक है। जल संस्थान की भंडारण क्षमता मात्र 8.50 एमएलडी है। ट्यूबवेलों के ऊपर ओवर हेड टैंक बनाने, लाइनों का पुनर्गठन और भंडारण क्षमता में वृद्धि किए बगैर समस्या का समाधान संभव नहीं है।
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