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ग्राम्या के दूसरे चरण पर संकट

Nainital

Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम विकास परियोजना (ग्राम्या) का दूसरा चरण अधर में लटक गया है। पांच महीनों से अधिकारी एवं कर्मचारी बेगार हैं। ग्राम्या के फील्ड प्रोजेक्ट बंद होने से कर्मचारियों के वेतन एवं दूसरे खर्चों के लिए बजट की कमी आड़े आने लगी है। ग्राम्या के वजूद पर संकट मंडराने से प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों ने अपने मूल विभागों में वापसी शुरू कर दी है।
उत्तराखंड में ग्राम्या का गठन वर्ष 2005-2006 में हुआ। इसमें जलागम, कृषि, वन, लघु सिंचाई और उद्यान विभाग से अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई। ग्राम्या का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का विकास एवं आर्थिक रूप से पिछड़े ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना था। कुमाऊं मंडल में ग्राम्या के हल्द्वानी, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और लोहाघाट में डिवीजन खोले गए। सभी डिवीजनों में विकास कार्यों के लिए प्रोजेक्ट चलाए गए। प्रोजेक्टों के तहत काश्तकारों को आधुनिक तरीके से खेतीबाड़ी की तकनीक, व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहन, फल एवं सब्जियों की ट्रेडिंग, फूड प्रोसेसिंग, मसाले पैकेजिंग की ट्रेनिंग एवं सुलभ बाजार मुहैया कराया गया।
खेतीबाड़ी के तौर तरीकों के अलावा ग्राम्या की पहल पर पंचायत के जंगलों में चारागाह विकसित किए गए, ताकि दुधारू मवेशियों को आफ सीजन में हरा चारा उपलब्ध हो सके। पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों को बचाने के लिए नौलों एवं तालाबों का संवर्द्धन और निर्माण कराया गया। गांवों को खड़ंजों से जोड़ने का काम हुआ। ग्राम्या की प्रथम पंचवर्षीय प्रोजेक्टों में करोड़ों रुपये के बजट से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास हुआ। ग्राम्या का प्रथम चरण 31 मार्च 2012 को खत्म हो गया। प्रोजेक्ट खत्म होने पर शासन ने इसकी समीक्षा कर विकास कार्यों की सराहना करते हुए जल्द दूसरा चरण शुरू कराने का आश्वास दिया। सरकार के आश्वासन को पांच महीने गुजर गए हैं, बावजूद दूसरा चरण शुरू नहीं होने से ग्राम्या के वजूद पर संकट आ गया है।
ग्राम्या में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने मूल विभागों के लिए वापसी शुरू कर दी है। इनमें यतीश पंत, रमेश शुक्ला और विष्णु दत्त जोशी अपने मूल विभाग वापस जा चुके हैं। अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। उनका कहना है कि शासन स्तर से दूसरे चरण के लिए हरी झंडी नहीं मिलने पर बाकी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भी जल्द अपने मूल विभागों को वापसी हो जाएगी।
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