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तहसील का ढांचा ही नहीं तौर तरीका भी अंग्रेजों का

Nainital

Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। हल्द्वानी तहसील में स्टाफ की कमी और अव्यवस्थाओं का खामियाजा भी लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बिजली कटौती से तहसील का कामकाज ठप है। दाखिल खारिज के लिए महीनों रुकना पड़ रहा है। प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं लाभ नहीं मिल रहा। आम जनता दाखिल खारिज और दूसरे कार्यों के लिए तहसील के चक्कर काटते काटते थक हार गई है।
हल्द्वानी तहसील भवन का ढांचा ही नहीं बल्कि कामकाज का तौर तरीका और पदों की स्वीकृति बाबा आदम के जमाने की हैं। क्षेत्र का विस्तार एवं विकास होने से तहसील में कामकाज कई गुना अधिक बढ़ गया है। लेकिन पुनर्गठन नहीं होने से स्वीकृत पदों की संख्या दशकों पुरानी है। राजस्व अभिलेखों का डाटा कंप्यूटराइज्ड होने से बिजली पर निर्भरता बढ़ी है। फायदा ये कि बिजली के गुल होते ही पूरा कामकाज ठप। बिजली बैक अप की ठोस व्यवस्था नहीं है। जनरेटर तो लगा है, लेकिन डीजल का बजट नहीं होने से वह भी अक्सर बंद रहता है।
स्टाफ की कमी और घंटों बिजली कटौती केक कारण महीनों तक प्रमाण जारी नहीं हो रहे हैं। जमीनों की खरीद फरोख्त के बाद दाखिल खारिज के लिए पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। दाखिल खारिज विंग में राजस्व कानूनों के महज दो पद हैं। हल्द्वानी तहसील में प्रतिमाह एक हजार से अधिक दाखिल खारिज होते हैं। इसमें भी वीआईपी ड्यूटी लगने और कंप्यूटराइज्ड डाटा फीड नहीं होने से दाखिल खारिज लटक जाते हैं।
सामान्य प्रक्रिया में अधिकतम 45 दिन के अंतराल में दाखिल खारिज होता है। इस अंतराल में क्रेता (वादी) के शपथ पत्र नहीं देने पर फाइल रिजेेक्ट हो जाती है। 90 दिनों तक फाइल तहसील कार्यालय में रहने के बाद जिला रिकार्ड कार्यालय ट्रांसफर हो जाती है। इसके बाद वादी के पुनर्विचार आवेदन पर ही दाखिल खारिज की प्रक्रिया शुरू होती है। दाखिल खारिज में दूसरे पक्ष की आपत्ति लगने पर उसकी सुनवाई नहीं होते तक प्रोसेसिंग लटक जाती है। हल्द्वानी तहसील में बिना किसी आपत्ति के एक हजार से अधिक दाखिल खारिज पिछले छह महीनों से लटके हैं। लटकने की वजह चुनावी ड्यूटी के बाद का बैक लाग, स्टाफ की कमी और बिजली की अघोषित कटौती है।

हल्द्वानी तहसील में 212 गांव शामिल हैं। इनमें 205 गांवों के अभिलेख कंप्यूटराइज हैं। जून माह से तहसील के 51 गांवों के अभिलेखों की आगामी छह सालों के लिए कन्वर्जन की प्रक्रिया चल रही है। कन्वर्जन प्रक्रिया होने से इन गांवों में जमीनों की खरीद फरोख्त के बाद दाखिल खारिज मैनुअल हो रहा है। कंप्यूटराइज्ड डाटा फीड नहीं होने से दाखिल खारिज का प्रिंट उपलब्ध नहीं हो रहा है। डाटा फीड होने के बाद ही कंप्यूटराइज्ड दाखिल खारिज की नकल उपलब्ध हो सकेगी। - एके वाजपेयी, तहसीलदार
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