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आखिर किसके वरदहस्त पर है यह रौब?

Nainital

Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। इसे कहते हैं चोरी करने के बाद धाक जमाना। एक अतिक्रमणकारी के सामने सब नतमस्तक। कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका। सरकारी जमीन पर कुदृष्टि ऐसी पड़ी कि बेखौफ कब्जे के बाद अब यह अपनी जमीन हो चुकी। कच्चे से पक्के निर्माण की तरफ कदम। कोई आए तो डंडे दिखाओ और खदेड़ दो। ...चोरी के बाद ऐसा रौब। आखिर किसका है वरदहस्त?
गौला बैराज के स्टोर रूम से सटी सरकारी जमीन पर सिर्फ एक कब्जाधारक को हटाने में सिंचाई विभाग को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। पांच माह पूर्व चार खंभे और ऊपर से टिन डालकर कब्जे की शुरूआत हुई थी। यह भूमि सिंचाई नहर के ठीक ऊपर और स्टोर रूम के बगल में है। लिहाजा एक महीने पहले सिंचाई विभाग के गौला बैराज में तैनात एक कनिष्ठ अभियंता अतिक्रमण हटाने के लिए गए तो कब्जाधारक गुर्रा उठा। डंडा लेकर पीछे पड़ा और साथ में यह धमक कि जमीन खाली कराने का प्रयास किया तो ऐसी जगह जाओगे जहां हवा तक ठीक से नहीं मिलेगी। हालांकि जेई की शिकायत के बाद यह मामला काठगोदाम थाने तक पहुंचा था मगर सब रफादफा हो गया। तब से किसी ने वहां फटकने की जुर्रत नहीं की है।
कब्जाधारक का पूरा कुनबा वहीं पर ठिकाना बनाकर रहता है। वर्ष 1978 में जब गौला बैराज बना था, तब उसी के साथ बैराज के कर्मचारियों के लिए आवास और स्टोर रूम भी बनाए गए। चोरगलिया रोड में पुल के बगल में बने स्टोर रूम के आसपास के जमीन सरकारी है। इधर, गौला बैराज के मुख्य गेट के भीतर भी आधा दर्जन झोपड़ियां बनाई गई हैं। इन झोपड़ियों में करीब करीब डेढ़ दर्जन लोग रहते हैं।

पुलिस प्रशासन की मदद लेंगे
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एमसी पांडे का कहना है कि कब्जाधारक के रौब को देखते हुए स्टोर रूम से सटी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस-प्रशासन की मदद ली जा रही है। कब्जा सिर्फ वहीं पर है। गौला बैराज के मुख्य गेट के भीतर जो झोपड़ियां बनी हैं उनमें बैराज के ही मजदूर रहते हैं। देरसबेर उन्हें भी हटाया जाएगा।

पार्क के लिए प्रस्तावित है जमीन
गौला बैराज मेन गेट के भीतर जो आधा दर्जन अस्थाई झोपड़ियां बनी हैं वह जमीन पार्क के लिए प्रस्तावित है। शाम के समय बैराज गेट के भीतर घुसकर फेरी वाले चना चाट और भुट्टा बेचने का धंधा भी करते हैं। इन पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है।
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