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गोलमाल है भई गोलमाल है

Nainital

Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। नगर निगम की चोरगलिया और राजपुरा में नवनिर्मित आठ दुकानों की टेंडर प्रक्रिया से की गई नीलामी पर सवाल उठने लगे हैं। छह लाख रुपये में दुकान लेने वाले व्यक्ति का टेंडर न पड़ने देने तथा वही दुकान केवल एक लाख 61 हजार में देने की शिकायत निगम की प्रशासक एवं जिलाधिकारी से की गई है। दुकानों की टेंडर प्रक्रिया निरस्त करने की मांग को लेकर सोमवार को दुकान के दावेदार ने एसडीएम को ज्ञापन भी दिया है।
मालूम हो कि तीन अगस्त को नगर निगम में चोरगलिया रोड और राजपुरा में नवनिर्मित आठ दुकानों की नीलामी के लिए टेंडर डाले गए थे। चोरगलिया रोड की दुकानों के कुछ लोगों को टेंडर डालने से रोकने पर हंगामा भी हुआ था। इन टेंडरों को उसी दिन अपराह्न तीन बजे खोला गया था। निगम की टेंडर प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे हैं। रामपुर रोड गली नंबर दो निवासी मजहर हुसैन ने डीएम से शिकायत की है कि चोरगलिया रोड, आजाद नगर की चार दुकानों के टेंडर नगर निगम द्वारा निकाले गए थे। उसने भी एक टेंडर चोरगलिया रोड की दुकान नंबर चार, प्रथम तल का खरीदा था जिसमें उसने छह लाख रुपये की कीमत भरी थी लेकिन जब वह टेंडर डालने नगर निगम पहुंचा तो वहां पहले से मौजूद कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे टेंडर डालने से रोक दिया। शिकायतकर्ता का यह आरोप भी है कि जब उसने विरोध किया तो अभद्रता करते हुए प्रभावशाली लोगों ने उसके हाथ से टेंडर जबरन छीन लिया, जिसके कारण वह टेंडर नहीं डाल सका। उसका कहना है कि जो दुकान वह छह लाख कीमत में ले रहा था, उसे निगम के अधिकारियों ने मात्र एक लाख 61 हजार में दे दिया है। इससे निगम को राजस्व की हानि हुई है। शिकायतकर्ता ने डीएम से मांग की है कि दुकानों के टेंडर निरस्त कराकर अपनी देखरेख में पुन: टेंडर कराएं। वह अभी भी दुकान नंबर चार छह लाख में खरीदने को तैयार है।


इधर, नगर निगम के अपर मुख्य नगर अधिकारी बीएस चलाल का कहना है कि शिकायतकर्ता मजहर हुसैन ने टैक्नीकल और फाइनेंशियल विट के टेंडर फार्म अलग - अलग बाक्स के स्थान पर एक ही बाक्स में डाल दिए थे। टेंडर कमेटी ने इसे शर्तों का उल्लंघन मानते हुए निरस्त कर दिया था। अगर दोनों विट के फार्म शर्तों के अनुसार डाले गए होते तो शिकायतकर्ता की राशि अधिक होने पर उसका ही टेंडर स्वीकृत होता। उन्होंने बताया कि दुकानों की अधिकतम राशि लगाने वालों की सूची बनाकर स्वीकृति के लिए प्रशासक को भेजी जा रही है, अब इसे स्वीकृत एवं निरस्त करने का अधिकार प्रशासक को ही है।
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