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सूखे के बाद अब उर्वरकों का संकट

Nainital

Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। बरसात नहीं होने से सूखे की चपेट में आई खरीफ की फसलों पर अब उर्वरकों का संकट गहरा गया है। कुमाऊं मंडल में खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की आवश्यकता की तुलना में खादें नहीं मिल रही हैं। डीएपी की मारामारी है। डीएपी की पर्याप्त सप्लाई नहीं होने से काश्तकार विकल्प के रूप में एनपीके पर निर्भर हैं। सहकारिता समितियों में उर्वरक नहीं मिलने से काश्तकार परेशान हैं।
फसलों को बचाने के लिए उर्वरकों के छिड़काव की जरूरत है। खासकर, धान की खेती के लिए डीएपी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा संतुलित करने के लिए डीएपी का छिड़काव होता है। उत्तराखंड में उर्वरकों की आपूर्ति इफ्को से होती है। इसके बाद कृषि विभाग के माध्यम से सहकारिता समितियों, गन्ना समितियों और निजी विक्रेताओं की दुकानों से उर्वरक काश्तकारों के खेतों तक पहुंचती है। सभी उर्वरकों पर केंद्र सरकार से सब्सिडी है। खरीफ की फसलों के लिए मंडल में आवश्यकता के सापेक्ष उर्वरकों की आपूर्ति नहीं मिल सकी है। समितियों में उर्वरक नहीं मिलने से काश्तकार खुले बाजार से मनमाने कीमत पर उर्वरक खरीदने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक मंडल में यूरिया, डीएपी और एनपीके का संकट है। खासकर, डीएपी नहीं है। धान की फसल के लिए भूमि में नाइट्रोजन की कमी पूरी करने के लिए एनपीके इस्तेमाल हो रही है। इससे एनपीके का भी संकट हो गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक नैनीताल जिले में यूरिया का छह हजार टन का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष 1771 टन ही यूरिया मिली है और 814 टन का काश्तकारों को वितरण हो सका है। इसी तरह अल्मोड़ा जिले के लिए 250 टन के सापेक्ष 143 टन की सप्लाई हुई है। इसमें मात्र 36 टन का वितरण हुआ है। बागेश्वर जिले में 143 टन और ऊधमसिंह नगर में 59895 टन यूरिया मिला है। पिथौरागढ़ में 300 टन के सापेक्ष मात्र 81 टन यूरिया की आपूर्ति हुई है।
एनपीके की आपूर्ति भी जरूरत के सापेक्ष काफी कम है। नैनीताल जिले में 3200 टन की जरूरत की तुलना में 1294 टन एनपीके का आवंटन और 472 टन का वितरण हो सका है। अल्मोड़ा में 100 टन की जरूरत की तुलना में 82 टन आपूर्ति और 24 टन का वितरण हुआ है। पिथौरागढ़ को 59 और बागेश्वर को 65 टन एनपीके मिला है। चंपावत में 88 टन आपूर्ति के सापेक्ष मात्र 25 टन एनपीके का वितरण हो सका है। उर्वरकों के संकट का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

जोत के आधार पर काश्तकारों को वितरण होते हैं उर्वरक
सहकारिता समितियों में 50 किलो एनपीके का बैग 823 रुपये और यूरिया का बैग 282 रुपये का है। इसी तरह 50 किलो के डीएपी का बैग 1000 रुपये का है। खुले बाजार में इनकी कीमत काफी अधिक है। सहकारी समितियों से काश्तकारों को उनकी जोत के हिसाब से ही उर्वरकों का वितरण किया जाता है।
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