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नाम पुलिस सहायता केंद्र, काम कुछ नहीं

Nainital

Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। टिन की चादरों से बना छोटा सा कमरा। नाम पुलिस सहायता केंद्र। काम कुछ नहीं। कभी दो-दो पुलिसकर्मियों की तैनाती और अब रखवाले की दरकार। जिस मकसद से इनका निर्माण कराया गया वह तो पूरा नहीं हो पाया। अलबत्ता पुलिस के रंग से रंगे ये डिब्बे शोपीस जरूर बन गए हैं। हल्द्वानी में 19 पुलिस सहायता केंद्रों को अपग्रेड करवाना भी अब पुलिस महकमे के लिए चुनौती बना है।
मित्र पुलिस का नाम और स्लोगन लिखे इन डिब्बों के आगे आए दिन जाम लगता है, चोरी, लूट की घटनाएं होती हैं। लेकिन देखने वाला कोई नहीं होता। सहायता केंद्र इसलिए स्थापित किए गए थे ताकि पुलिस खुद को जनता के करीब बता सके। छोटी घटनाओं को सहायता केंद्रों से ही निपटाया जा सके। स्थापना के बाद इनके बहुत जल्द बंद हो जाने के पी0छे सबसे बड़ा कारण सुविधाओं की कमी रही है। किसी भी टिन के डिब्बे में न तो बिजली है और न ही पानी। भाबर जब गर्मी में उबल रहा हो तो तब हवा का बंदोबस्त तक नहीं होता। ऐसे में कोई पुलिसकर्मी इन बॉक्सों में बैठे भी तो आखिर कैसे। बस कुछ दिन चले और फिर ठहर गए।
तिकोनिया का पुलिस सहायता केंद्र जिस जगह पर बना है उसके ठीक पीछे सैमसंग प्लाजा शोरूम से करीब तीन माह पूर्व चोरों ने पूरा शोरूम खंगाला था। चौराहे के पास बना इस लावारिस बॉक्स ने तब चोरी देखी तो अब आए दिन सड़कों पर जाम का तमाशा दिखता है। 19 में से एक भी सहायता केंद्र ऐसा नहीं जिसे पुलिस महकमा चला पाने की स्थिति में हो। सड़क किनारे इन बाक्सों ने जो जगह घेरी है उसे खुला छोड़ने के लिए सबसे पहले बॉक्स हटाने होंगे। लेकिन पुलिस यह भी नहीं कर पा रही। पुलिस महकमे ने इन्हें बंद करने के बाद लावारिस छोड़ दिया। हां कानून व्यवस्था के विस्तार के नाम पर बने डिब्बे रात में विक्षिप्तों की शरणगाह जरूर बनते हैं।

मुखानी में दस सहायता केंद्र
सबसे ज्यादा मुखानी चौकी के अंतर्गत कुल दस सहायता केंद्र हैं। भोटियापड़ाव, वनभूलपुरा, मंगलपड़ाव के साथ ही मेडिकल चौकी और टीपीनगर चौकी के अंतर्गत बाकी बचे हुए नौ सहायता केंद्र आते हैं। इन केंद्रों में शुरूआत में दो कांस्टेबल हर समय तैनात रहते थे और बकायदा अपराध रजिस्टर भी बनाया गया था। सूचना के आदान-प्रदान के लिए सहायता केंद्रों में शुरूआत से ही वायरलेस सेट तक नहीं रखे गए।

इनका कहना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. सदानंद दाते का कहना है कि जिस जगह पर इस समय पुलिस सहायता केंद्र बने हैं उनका संचालन इसलिए मुमकिन नहीं है क्योंकि सुविधाएं नहीं जुटाई जा सकती। लेकिन सहायता केंद्रों को पूर्णतया बंद भी नहीं किया जाएगा। ऐसी जगह तलाशी जा रही हैं जहां बिजली, पानी, संचार सुविधा उपलब्ध हो सके। उनका कहना है कि डिब्बों को जल्द हटाया जाएगा।
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