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कैमल्स बैक की पहाड़ी दरकी, नारायण नगर में तबाही

Nainital

Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
नैनीताल। कैमल्स बैक की पहाड़ी शनिवार को हुई भारी बरसात से दरक गई। नगर से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित इस पहाड़ी में हुए भूस्खलन से नारायण नगर क्षेत्र में भारी तबाही मची। पहाड़ी से गिर रहे मलबे, पत्थरों की रफ्तार को नारायण नगर क्षेत्र से सटा नाला सह नहीं सका और उसका रुख आवासों की तरफ हो गया। इससे आधा दर्जन घरों में करीब दो फीट तक मलबा और दर्जन भर आवासों में पानी घुस गया। खिड़कियां तोड़कर बच्चों और वृद्धों की जान बचाई गई। नाले के समीप मारुति कार के खड़े होने से मलबे की रफ्तार कम हुई अन्यथा हादसा विकराल हो सकता था। मारुति कार मलबे में दब गई।
बरसात के दौरान हमेशा दहशत में रहने वाले नारायण नगर क्षेत्र के परिवारों को आज दिन में तबाही का सामना करना पड़ा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यही हादसा रात्रि के अंधेरे में होता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। शनिवार को दिन में लगभग 2 बजे कैमल्स बैक की पहाड़ी से मलबा आने लगा। मलबे ने वहां स्थित नाले के मुहाने को बंद कर दिया। 2.15 बजे से भारी में मलबे ने रुख बदलकर क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी। इस दौरान क्षेत्र में चीख पुकार मच गई। लोगों ने सामान बचाने का प्रयास किया लेकिन तब तक घरों में 1.5 से 2 फीट तक मलबा, पत्थर भर गए। खिड़कियों को तोड़कर बुजुर्गों, बच्चों को घरों से बाहर निकाला गया। मलबे में दबी मारुति 800 यूपी 06जी0483 को बाहर निकाला गया। दोपहर करीब 2.15 बजे से 3.45 तक क्षेत्र में तबाही का मंजर रहा।
शाम करीब 5.30 बजे से लोग घरों से मलबा निकालने में जुट गए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासनिक, पालिका, पीडब्लूडी के कोई अधिकारी, कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। क्षेत्र के संजय कुमार, ज्योति प्रसाद, निखिल, देवानंद, मोहन, प्रदीप कुमार, रवि कुमार, निखिल, अमन, राजू, योगेश आदि श्रमदान कर नाले, घरों की सफाई करने में लगे हुए थे। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह क्षेत्रवासियों की सुरक्षा के लिए सार्थक पहल करें, नहीं तो भविष्य में कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है।

रो-रोकर सुनाई व्यथा
नैनीताल। तबाही की व्यथा सुनाते हुए आशा देवी की आंखें भर आई उनका कहना था कि पानी में भीगी उनकी पोती खुशी (9), कृतिका (7) पानी में डूबे हुए रो रहे थे, लेकिन वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही थीं। क्षेत्र के रमेश तथा संजय ने खिड़की तोड़कर उनकी पोतियों को बाहर निकालकर नया जीवन दिया। ज्योति प्रकाश ने बताया कि तबाही का मंजर देख वह काफी डर गए थे। उन्होंने त्वरित पिता मदन, पुत्रियां हिमानी, अंकिता को किसी तरह घर से बाहर निकाला। चंद्रा देवी ने बताया कि उनके पति शंकर लाल (71) काफी बीमार है। घर में मलबा व पानी घुस जाने से वह काफी डर गई। क्षेत्रवासियों की मदद से उनके घर से पानी बाहर निकाला गया।

मारुति 800 ने रोकी तबाही की रफ्तार
नैनीताल। क्षेत्रवासियों ने बताया कि क्षेत्र में खड़ी मारुति 800 संख्या यूपी 06जी0483 के चलते काफी मात्रा में मलबा व पत्थर उससे रुक गए, जिससे घरों को जाने वाला बहाव कुछ कम हुआ। उनका कहना है कि यदि नाले के समीप स्थित सड़क में मारुति खड़ी न होती तो घरों में और तबाही हो सकती थी। ब्यूरो

दर्जनों परिवारों पर खतरा बरकरार
नैनीताल। शनिवार को हुई वर्षा के बाद आशा देवी, चंद्रा देवी, ज्योति प्रसाद, श्याम लाल, गंगा देवी, रीता देवी, हरीश चंद्र, विमला देवी पुष्पा आदि के भवन प्रभावित हुए। क्षेत्रवासियों के मुताबिक लगभग आधा दर्जन घरों में पानी व मलबा घुसा तथा लगभग इतने ही घर नाले के पानी से प्रभावित हुए। क्षेत्रवासियों के मुताबिक नारायण नगर क्षेत्र में 100 परिवार रहते हैं, जबकि लगभग तीन दर्जन परिवार नाले से लगे क्षेत्र में रहते हैं। पूर्व सभासद देवानंद ने बताया कि वर्ष 1997 में क्षेत्र के लोगों के विस्थापन की प्रक्रिया की शुरूआत हुई थी, लेकिन बाद में यह ठंडे बस्ते में चली गई।

क्षेत्रवासियों ने कहा याद आया 1984
नैनीताल। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बीते वर्षों में भी कई बार क्षेत्र के घरों में मलबा तथा पानी घुसने की घटना हुई। लेकिन क्षेत्र के लोगों के एक दूसरे को सहयोग देने से त्वरित राहत मिल सकी। लेकिन 1984 में क्षेत्र में ऐसी ही घटना हुई थी, जिसके बाद कैमल्स बैक की पहाड़ी के पानी की निकासी को नाला बनाया गया। नाले की नियमित सफाई न होने तथा नाला चौड़ा न होने के कारण तथा पहाड़ी से अक्सर मलबा आने पर वह बंद हो जाता है। क्षेत्रवासियों ने नाले की नियमित सफाई किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कई बार तो भारी बरसात में अक्सर वह अन्यत्र शरण ले लेते हैं।

चुनाव तक सीमित है जन प्रतिनिधि
नैनीताल। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि चुनाव तक सीमित हैं। उनका कहना है कि कई दशकों से वह चुनाव में मतदान करते हैं, लेकिन चुनने के बाद जनप्रतिनिधि यहां नहीं पहुंचते। इस बार के जनप्रतिनिधि भी उनकी कुशल क्षेम पूछने नहीं पहुंचे हैं।
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