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गीत सबने सुने, गुहार कोई नहीं सुनता

Nainital

Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी। भाबर जन जाया बालम... गीत से सत्तर-अस्सी के दशक में लोकप्रिय हुईं लोक गायिका कबूतरी देवी की विडंबना तो देखिए आज वे खुद भाबर में जिंदगी और मौत के बीच फंसी पड़ी हैं। हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। सबको अपनी मीठी आवाज से कायल बनाने वाली कबूतरी आज खुद ही सुनने में असमर्थ है। फेफड़ों में इंफेक्शन है। इससे पूरा शरीर सूज गया है। उपचार कराने तक के लिए पूरे पैसे नहीं हैं। एक दौर में उनके गीतों को एक टक सुनने वालों के कानों तक भी उनकी गुहार नहीं पहुंचती सरकार से तो उम्मीद ही छोड़िए। अगर शासन-प्रशासन ने पहल की होती तो हमारी संस्कृति और कला के प्रतीक गिर्दा, शेरदा, शैलेश मटियानी जैसे लोगों को जीवन में ही सम्मान मिल गया होता।
कुमाऊं की तीजन बाई के नाम से मशहूर कबूतरी (69) ऋतु गायन परंपरा की प्रतीक हैं। ये परंपरा केवल कुमाऊं में कायम है। उनके साथ ऐसा कोई नाम नहीं जिसने पहाड़ के दर्द को इतने सुरमयी तरीके से अपने गीतों में गुंथा हो। ये हुनर उन्हें अपने पिता रामकली से विरासत में मिला था और उनके पति दीवानी राम इसे दुनिया के सामने लाए। कबूतरी का मायका चंपावत है। पिथौरागढ़ जिले के क्वीतड़, सौनपट्टी में उनकी ससुराल है। शादी के बाद उनकी आवाज सुनने पर दीवानी राम कबूतरी को लखनऊ ले गए। आकाशवाणी लखनऊ में ही उन्होंने अपना पहला गीत गाया। इसके बाद नजीबाबाद, आल इंडिया रेडियो रामपुर और मुंबई में भी कबूतरी ने प्रस्तुति दी।
कबूतरी ने जो गया है उसे जीया भी है। इसलिए तो 28 साल पहले पति की मौत के बाद भी उन्होंने पहाड़ नहीं छोड़ा। जबकि कैसेट कंपनियों से उन्हें गाने के लिए कई ऑफर मिले। भले ही ये दौर मुफलिसी में गुजरा लेकिन कबूतरी ने अपना गांव नहीं छोड़ा। पति की मौत के करीब 15 साल बाद भी उन्होंने गीत गाए तो केवल सांस्कृतिक मंचों पर पैसे के लिए नहीं। आज पहाड़ की ये लोक गायिका उपेक्षा से बेहद आहत हैं। तीन महीने पहले भी पथरी के कारण उन्हें एसटीएच में भर्ती किया गया था। स्वस्थ होने पर कबूतरी देवी बड़ी बेटी मंजू के ससुराल खटीमा लौट गई थी। पिछले एक सप्ताह से कबूतरी देवी फिर अस्वस्थ चल रही हैं। छोटी बेटी हेमंती देवी ने उन्हें रामपुर रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। समाजसेवी एवं आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा एवं उनके सहयोगी सोमवार को कबूतरी देवी को सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में उनके फेफड़ों की जांच कराई गई। चिकित्सकों के मुताबिक कबूतरी देवी का इलाज चल रहा है और जल्द ठीक हो जाएंगी। कानों में मशीन लगवाई जाएगी, ताकि वे सुन सकें।
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