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64 भोजन माताओं की रोजी-रोटी पर संकट

Haridwar

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
रुड़की। क्षेत्र के पांच विकासखंडों की 64 भोजन माताओं की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। शिक्षा विभाग का नया शासनादेश लागू हुआ तो क्षेत्र के ऐसे 64 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल से एक-एक भोजन माताओं की छंटनी की जाएगी, जहां दो-दो भोजन माताओं की तैनाती की गई है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजना शुरू की थी। कुछ समय तक छात्रों को राशन दिया जाता था, लेकिन बाद में स्कूल में ही भोजन बनाने की व्यवस्था की गई। भोजन बनाने के लिए भोजन माताओं की तैनाती की गई। शुरुआत में भोजन माताओं का मानदेय पांच सौ रुपये था, जो अब 1500 सौ रुपये कर दिया गया। साल में एक बार वर्दी और साबुन के खर्चे के लिए एक हजार रुपये भी मिलता है। लेकिन अब शिक्षा विभाग के नए शासनादेश ने ऐसे स्कूलों की भोजन माताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जहां छात्रों की संख्या 50 से कम है और वहां दो-दो भोजन माताओं की तैनाती है। नए शासनादेश के अनुसार, अब दूसरी भोजन माता का चयन 50 से अधिक छात्रों पर किया जाना है।

क्या है शासनादेश
14 अगस्त 2012 को जारी शासनादेश के अनुसार अब 1 से 50 तक छात्रों की संख्या पर एक भोजन माता, 51 से 100 तक दो, 150-200 तक तीन, 201-300 पर चार और 350 से ज्यादा छात्रों पर पांचवीं भोजनमाता का चयन किया जाना है। जबकि पहले 26 छात्रों पर की गई थी दो भोजन माताओं की तैनाती।

शासनादेश के अनुसार, छंटनी का आधार
1. वही भोजन माता काम करेगी, जिसका बच्चा स्कूल में पढ़ रहा हो।
2. यदि दोनों के बच्चे अध्ययनरत हैं तो ऐसे में सबसे निचली कक्षा में जिसका बच्चा है वह काम करेगी।
3. यदि दोनों के बच्चे निचली कक्षा में हैं तो जिसकी नियुक्ति बाद में हुई उसको हटा दिया जाएगा।
4. एक ही दिन चयन होने पर जिसके बच्चे की उम्र ज्यादा होगी उसे हटा दिया जाएगा।
5. यदि किसी का भी बच्चा नहीं पढ़ रहा तो बाद में तैनात होने वाली भोजन माता को हटा दिया जाएगा।
6. विद्यालयों के विलीनीकरण की दशा में जो विद्यालय संचालित होगा उसी की भोजन माता काम करेगी।

कहां कितने 50 से कम संख्या वाले प्राथमिक विद्यालय
रुड़की विकासखंड में पांच, भगवानपुर विकासखंड में 13, नारसन विकासखंड में 14, लक्सर विकासखंड में 18 और चार जूनियर हाईस्कूल, खानपुर विकासखंड में 10 स्कूल शामिल हैं। इनमें दो-दो भोजन माताएं तैनात हैं।
इस शासनादेश के लागू होने से पूरे प्रदेश में करीब एक हजार भोजन माताएं बेरोजगार हो जाएंगी। संगठन लगातार दबाव बना रहा है कि दस साल से कार्यरत भोजन माताओं की छंटनी न की जाए। यदि ऐसा होता है तो आंदोलन किया जाएगा।
- ऊषा देवी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड भोजन माता संगठन
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64 food crisis

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